CBI विवाद: CJI रंजन गोगोई और जस्टिस सीकरी के बाद नागेश्वर राव की नियुक्ति के खिलाफ सुनवाई से एक और जज हुए अलग, बताई ये वजह

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एम नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से एक और जज ने खुद को अलग कर लिया है। नागेश्वर राव मामले में जस्टिस एन.वी.रमना ने गुरुवार (31 जनवरी) को खुद को अलग कर लिया। बता दें कि इस मामले से सीजेआई रंजन गोगोई और जस्टिस एके सीकरी खुद को पहले ही अलग कर चुके हैं। अब यह मामला एक नई बेंच को ट्रांसफर किया जाएगा।

मामले की सुनवाई से खुद को अलग करते हुए न्यायमूर्ति रमना ने कहा कि राव उनके पैतृक नगर से हैं और वह राव की बेटी की शादी में शामिल हुए थे। न्यायमूर्ति रमना ने मामले को उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के लिए प्रधान न्यायाधीश के पास भेज दिया। न्यायमूर्ति रमना इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग करने वाले तीसरे न्यायाधीश हैं।

इससे पहले प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी भी खुद को इससे अलग कर चुके हैं। एम नागेश्वर राव की केंद्रीय जांच ब्यूरो के अंतरिम निदेशक के रूप में नियुक्ति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) कॉमन कॉज ने सीबीआई के अंतरिम निदेशक के रूप में राव की नियुक्ति के केंद्र के फैसले को न्यायालय में चुनौती दी है।

‘कामन काज’ ने यह जनहित याचिका दायर की है और इसमें जांच ब्यूरो के अंतरिम निदेशक के रूप में एम नागेश्वर राव की नियुक्ति निरस्त करने का अनुरोध किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से दायर इस याचिका में दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान कानून, 1946 की धारा 4 ए के तहत लोकपाल और लोकायुक्त कानून, 2013 में किए गए संशोधन में प्रतिपादित प्रक्रिया के अनुसार केंद्र को जांच ब्यूरो का नियमित निदेशक नियुक्त करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति ने आलोक वर्मा को पद से किया बर्खास्त

गौरतलब है कि सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा ने हाल ही में सेवा से इस्तीफा दे दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने उन्हें सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया था। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 1979 बैच के अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम एवं केंद्रशासित प्रदेश (एजीएमयूटी) कैडर के अधिकारी वर्मा का तबादला महानिदेशक दमकल सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षा के पद पर कर दिया गया था।

सीबीआई निदेशक के पद पर वर्मा का दो वर्षों का कार्यकाल आगामी 31 जनवरी को पूरा होने वाला था। लेकिन इससे 21 दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी, लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए के सीकरी की समिति ने 2-1 के बहुमत से वर्मा को सीबीआई प्रमुख के पद से हटाने का फैसला किया। पीएम मोदी और न्यायमूर्ति सीकरी वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाने के पक्ष में थे, जबकि खड़गे ने इसका विरोध किया। इसके बाद सरकार ने सीबीआई के नागेश्वर राव को एक बार फिर अंतरिम निदेशक नियुक्त कर दिया।

 

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