‘द वायर’ की पत्रकार आरफ़ा ख़ानम शेरवानी ने ‘भारत माता की जय’ को बताया ‘सांप्रदायिक’, ट्विटर पर मचा बवाल

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केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ को लेकर कई विवाद सामने आ चुके हैं।इतना ही नहीं देशभक्ति और गाय के नाम पर भीड़ द्वारा की जा रही हत्याओं को लेकर पिछले साल जुलाई महीने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने तो ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ नहीं बोलने वालों को देशद्रोही तक घोषित कर दिया था।

इन नारों को लेकर पिछले दिनों गुजरात की कच्छ यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी का सनसनीखेज मामला सामने आया था। यहां एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने छात्र चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए एक प्रोफेसर के मुंह पर कालिख पोत दी थी। इतना ही नहीं कालिख पोतने के बाद इन छात्रों ने प्रोफेसर का जुलूस भी निकाला। साथ ही ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाए।

इस बीच एक फिर ‘भारत माता की जय’ को लेकर माइक्रो ब्लागिंग साइट ट्विटर पर घमासान मचा हुआ है। यह घमासान ‘द वायर’ की पत्रकार आरफ़ा ख़ानम शेरवानी द्वारा ‘भारत माता की जय’ को ‘सांप्रदायिक’ बताए जाने को लेकर मचा हुआ है। दरअसल, अंकुर तिवारी नाम के एक यूजर ने पत्रकार से पूछा कि क्या ‘भारत माता की जय’ सांप्रदायिक है? इस पर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी ने लिखा कि हां सांप्रदायिक है।

बीजेपी समर्थक और दक्षिणपंथी विचारधारा की तरफ झुकाव रखने वाले कुछ लोग आरफ़ा के इस ट्वीट पर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। यह विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब आरफ़ा ने एक ट्विट कर दावा किया कि तीन तलाक बिल लोकसभा में एकमत से सभी सांसदों ने ‘भारत माता की जय’ कहते हुए सहमति से पास करवाया।

इस पर अंकुर तिवार ने पूछा कि क्या ‘भारत माता की जय’ कहना सांप्रदायिक है? यूजर के सवाल पर पत्रकार ने कहा कि हां, भारत माता की जय सांप्रदायिक है। दक्षिणपंथी विचारधारा की तरफ झुकाव रखने वाले पत्रकार और यूजर्स अब आरफ़ा पर हमलावर हो गए हैं। हालांकि कुछ लोग उनका समर्थन भी करते हुए दिख रहे हैं। शनिवार (29 दिसंबर) सुबह से ही ट्विटर पर #BharatMataKiJai नंबर वन पर ट्रेंड कर रहा है।

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