पढ़ें, डंडे से व्यवस्था की ताकत को चुनौती देते इस बुजुर्ग किसान की मार्मिक फोटो के पीछे की पूरी कहानी, वायरल हुई तस्वीर

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हरिद्वार से किसान क्रांति यात्रा लेकर दिल्ली पहुंचे किसानों ने आखिरकार अपना मार्च वापस ले लिया है। सारे किसान दिल्ली-यूपी बॉर्डर से रात में ही पहले किसान घाट आए और उसके बाद अब किसान घाट से आंदोलन खत्म करके घर लौट गए हैं। डीसीपी (ईस्ट) पंकज सिंह ने बताया कि करीब पांच हजार किसानों को आधी रात दिल्ली में अंदर आने की इजाजत दी गई। वे सभी निर्धारित जगह किसान घाट पहुंचे और सुबह छह बजे तक वहां से वापस अपने घर लौट गए।

फोटो: रवि चौधरी/पीटीआई

इससे पहले, मंगलवार की सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे दिल्ली-यूपी गेट के पास एनएच-24 पर राजधानी के अंदर दिल्ली पुलिस से इजाजत नहीं मिलने के बाद प्रदर्शनकारी किसानों और सुरक्षाबलों में हुई हिंसक झड़प हुई। किसानों ने जब गाजीपुर में पुलिस घेराबंदी तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया तो पुलिस ने पहले उन पर पानी की बौछार की और इसके बाद भी जब वे नहीं माने तो आंसू गैस के गोले भी दागे। इस दौरान कुछ प्रदर्शकारियों को चोटें भी आई।

रवि चौधरी ने अपने कैमरे में किया कैद

इस घटनाक्रम के बीच एक ऐसी तस्‍वीर सामने आई जिसने मंगलवार से ही सोशल मीडिया पर सनसनी फैला दी है। क्‍या आम.. क्‍या खास, सभी ने इस फोटो को शेयर कर अपने-अपने हिसाब से व्‍याख्‍या की। लेकिन सोशल मीडिया पर देखते ही देखते इस तस्वीर को अपने कैमरे में कैद करने वाले फोटोग्राफर की तलाश शुरू हो गई। दरअसल, लोग जानना चाहते थे कि आखिर किन हालात में ये फोटो बनी।

लोग जानने के लिए उत्सुक थे कि इस तस्वीर में जो दिख रहा है उसके आगे क्‍या था और ऐसा क्‍या है जो इस फोटो में दिख नहीं रहा। हालांकि अब तलाश पूरी हो गई है। इस तस्वीर को रवि चौधरी नाम के फोटोग्राफर ने अपने कैमरे में कैद किया है। रवि वरिष्‍ठ फोटो पत्रकार हैं और समाचार एजेंसी पीटीआई से जड़े हुए हैं। इस तस्‍वीर की सच्‍चाई फोटोग्राफर ने aajtak.in से बातचीत में शेयर किया है।

क्या है वायरल तस्वीर की कहानी?

रवि ने बताया, ‘हमें जानकारी थी कि किसान आज (मंगलवार) दिल्ली में दाखिल हो सकते हैं और पुलिस उन्हें दिल्ली-यूपी सीमा के पास रोक सकती है। इसलिए मैं सुबह सात बजे ही यहां पहुंच गया था। काफी देर इंतजार करने के बाद किसानों का एक छोटा समूह 9 बजे के आसपास पहुंचा करीब 11 बजे के आसपास लगभग पांच हजार किसान आ गए। कुछ किसान पीछे, थोड़ी दूरी पर रुके हुए थे। किसानों के रास्ते में यूपी पुलिस की भी एक बैरिकेडिंग थी। उस बैरिकेड को किसानों ने हटा दिया और यूपी पुलिस के जवानों ने भी एक तरह से उन्हें रास्ता दे दिया।’

उन्होंने आगे कहा, ‘अब किसानों का जत्था अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ दूसरी बैरीकेड के पास पहुंचा। ये बैरीकेड दिल्ली पुलिस ने लगाया था। एक तरफ जोश से भरे किसानों का जत्था और बैरीकेड के दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस के जवान और वॉटर कैनन की गाड़ियां खड़ी थीं। मैं अपने कुछ फोटोग्राफर साथियों के साथ इस सड़क से लगे फ्लाईओवर पर खड़ा था।किसानों के हाथ में झंडे थे। पुलिस के जवान भी डंडे और आंसू गैस के गोले छोड़ने वाले गन से लैस थे। नारेबाज़ी करते हुए किसान आगे जाने की कोशिश कर रहे थे। वो अपनी ट्रैक्टर से बैरीकेड को हिलाने की कोशिश भी कर रहे थे।’

मार्मिक लगा दृश्य

फोटोग्राफर ने बताया, ’11:30 बजे के आसपास पुलिस ने किसानों पर वॉटर कैनन का इस्तेमाल शुरू किया। करीब-करीब 10 मिनट तक पुलिस ने किसानों पर इसका इस्तेमाल किया। इसके तुरंत बाद उन्होंने आंसू गैस के गोले दागने शुरू किए। मैं कई और प्रदर्शन कवर कर चुका हूं और उस हिसाब से कहूं तो पुलिस ने काफी देर तक किसानों पर पानी बरसाया और आंसू गैस के गोले दागे। किसान इस एक्शन से तितर-बितर हो गए। उनके झंडों में से कपड़ा गायब हो गया और उनके हाथ में केवल डंडे रह गए। किसानों ने पुलिस की तरफ कुछ-कुछ फेंकना शुरू किया। उनमें काफी गुस्सा था।’

उन्होंने आगे कहा, ‘तभी मुझे दिखा कि सड़क के किनारे कुछ हो रहा है। मैंने अपने कैमरे का जूम बढ़ाया तो दिखा कि पुलिस के डंडे के जवाब में एक बुजुर्ग किसान ने भी डंडा उठाया हुआ है। मुझे यह दृश्य काफी मार्मिक लगा। अक्सर जब पुलिस की लाठियां चलती हैं तो लोग भाग खड़े होते हैं या पुलिस की लाठी से खुद को बचाने की कोशिश करते हैं। लेकिन यहां ऐसा नहीं था। तस्वीर में आप देख सकते हैं कि एक तरफ पुलिस के कई जवान हैं वहीं दूसरी तरफ वो (किसान) अकेले खड़े हैं।’

पहले नहीं देखा ऐसा कोई दृश्य

रवि ने कहा कि कई सालों से इस फील्ड में हूं। हर कुछ दिन में एक बार प्रदर्शनकारियों और पुलिस को आमने-सामने पाता हूं लेकिन आज से पहले मैंने ऐसा कोई दृश्य नहीं देखा था। इस तस्वीर में व्यवस्था की ताकत को एक बुजुर्ग किसान का गुस्सा, चुनौती दे रहा है। मानों वो कह रहा है, हम हारे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मैं 2008 से फोटो पत्रकारिता कर रहा हूं। ऐसी किसी भी स्थिति में काम करना बहुत मुश्किल होता है। लेकिन हम ऐसे ही हालात में काम करते हैं। मुझे लगता है कि ये तस्वीर तब-तब याद की जाएगी, जब-जब किसानों के विरोध का जिक्र होगा।

आपको बता दें कि यूनियन के नेता राकेश टिकैत के नेतृत्व में किसान कर्ज माफी तथा अन्य मांगों को लेकर राजधानी में प्रदर्शन के लिए आना चाहते थे। किसानों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उन पर लाठी चार्ज किया और गोलीबारी भी की। हालांकि एडीजी (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने इस आरोप को खारिज कर दिया और कहा कि किसानों पर कोई फायरिंग नहीं की गई।

 

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