अर्नब गोस्वामी के विरुद्ध दर्ज दो FIR रद्द करने की याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

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पालघर में दो साधुओं सहित तीन व्यक्तियों की पीट-पीट कर हत्या किए जाने की घटना के मामले और लॉकडाउन के दौरान बांद्रा रेलवे स्टेशन के बाहर एकत्रित हुए प्रवासियों के मुद्दे पर कथित रूप से भड़काऊ टिप्पणी करने के लिए अंग्रेजी समाचार चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ के विवादास्पद एंकर और संस्थापक अर्नब गोस्वामी के खिलाफ दायर दो प्राथमिकी को रद्द करने की गोस्वामी की याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

अर्नब गोस्वामी

न्यायमूर्ति उज्जल भुयान और न्यायमूर्ति रियाज चगला की खंड पीठ ने यह भी कहा कि जब तक न्यायालय आदेश नहीं सुना देता तब तक याचिकाकर्ता (अर्नब गोस्वामी) के खिलाफ पुलिस द्वारा किसी भी प्रकार की सख्त कार्रवाई न करने का अदालत का पूर्व में दिया गया आदेश जारी रहेगा।

गोस्वामी ने अपने विरुद्ध नागपुर और मुंबई में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की याचिका दायर की थी। नागपुर में दर्ज मामले में गोस्वामी ने पालघर मुद्दे पर समाचार चैनल पर कथित रूप से ऐसी टिप्पणी की थी जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका थी।

मुंबई के पयधोनी में मामला तब दर्ज हुआ था जब चैनल पर दिखाए गए एक अन्य कार्यक्रम के दौरान बांद्रा रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों के एकत्रित होने के की घटना पर गोस्वामी ने कथित तौर पर एक समुदाय के बारे में भड़काऊ टिप्पणी की थी।

बता दें कि, पालघर में भीड़ द्वारा साधुओं की पीट-पीटकर हत्या के मामले पर एक समाचार शो में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ कथित अपमानजनक बयान को लेकर अर्नब गोस्वामी के खिलाफ प्राथमिकियां दर्ज कराई गई हैं। अप्रैल 2020 के आखिरी हफ्ते में मुंबई पुलिस ने अर्नब गोस्वामी से 12 घंटे की पूछताछ कर चुकी है। (इंपुट: भाषा के साथ)

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