राफेल विवाद: मोदी सरकार पर तेजस्वी यादव का तंज, बोले- ‘अगर HAL किसी काम का नहीं तो उसे भी रिलायंस को बेच दो’

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राफेल विमान सौदे पर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के सनसनीखेज दावे के बाद भारत में सियासी घमासान जारी है। राफेल सौदे में ‘ऑफसेट साझेदार’ के संदर्भ में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के कथित बयान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विपक्ष लगातार हमला बोल रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि यह ‘स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार का मामला’ है।

कार्टून
file photo

दरअसल, फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने मीडियापार्ट को दिए इंटरव्यू में कहा कि राफेल सौदे में रिलायंस का नाम खुद भारत सरकार ने सुझाया था। ओलांद का साक्षात्कार दुनिया के कई टीवी चैनलों पर प्रसारित होने के बाद राफेल सौदे को लेकर सरकार और विपक्ष दोनों की तरफ से प्रतिदिन आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। उनके इस बयान के बाद विपक्षी पार्टियों के आरोपों को बल मिला और उन्होंने सरकार पर हमलावर तेवर अख्तियार कर लिए है।

तेजस्वी यादव ने मोदी सरकार पर बोला हमला

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष और चारा घोटाला के कई मामलों में सजा काट रहे लालू प्रसाद यादव के बाद अब उनके बेट वह बिहार के पूर्व उपमुख्यंत्री तेजस्वी यादव ने भी ट्वीट कर राफेल विवाद पर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला किया था। आरजेडी नेता तेजस्वी ने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए ट्वीट कर लिखा है, “सुनो फर्ज़ी राष्ट्रवादियों, अगर HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) किसी काम का नहीं तो उसे भी रिलायंस को बेच दो।”

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के पूर्व चीफ टीएस राजू के एक बयान ने मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी है। दरअसल, हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के पूर्व चीफ टीएस राजू ने कहा है कि एचएएल भारत में राफेल विमानों का विनिर्माण कर सकती थी। पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल विमान सौदे का ठेका सरकारी उपक्रम हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को नहीं दिए जाने के संदर्भ में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पर ‘झूठ बोलने’ का आरोप लगाते हुए उनसे इस्तीफे की मांग की थी।

लालू ने भी साधा निशाना

तेजस्वी यादव से पहले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष और चारा घोटाला के कई मामलों में सजा काट रहे लालू प्रसाद ने भी सोमवार (24 सितंबर) को राफेल सौदे में कथित घपले को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा। लालू के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से तंज कसते हुए लिखा गया है कि अब तो जहाज ही चुराकर खाने लग गए हैं। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर उन्हीं के चुटीले अंदाज में लिखा गया, ‘जहजवा ही चुराकर खाने लग गए वो भी लड़ाकू….ऊ भी मिसाइल से लैस। गजबे बा।’

राहुल बोले- ‘अभी तो सिर्फ शुरुआत हुई है’

अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को एक बार फिर राफेल मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया वॉलंटियर्स को संबोधित करते हुए कहा कि अभी तो सिर्फ शुरुआत हुई है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “जब अनिल अंबानी की कंपनी से डील कराई गई थी, तब उनकी कंपनी नहीं बनी थी। 10 दिन पहले कंपनी बनवाई गई और फिर भी उन्हें कॉन्ट्रैक्ट दिला दिया गया।” समाचार एजेंसी आईएएनएस के अनुसार, उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने 126 राफेल विमान फ्रांस से खरीदने के लिए समझौता किया था। एक राफेल विमान की कीमत 526 करोड़ रुपये थी। हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को उसका कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था जिससे युवाओं, इंजीनियरों को रोजगार मिलता।

राहुल ने कहा, “देश के चौकीदार फ्रांस जाते हैं और वहां के राष्ट्रपति से सौदा होता है। मोदी कहते हैं कि एचएएल को छोड़िए, अनिल अंबानी की कंपनी को राफेल विमान खरीदने का कॉन्ट्रैक्ट दे दो और उन्होंने 526 करोड़ रुपये के बजाय 1,600 करोड़ रुपये में राफेल विमान खरीदा।”

सीवीसी से मिले कांग्रेस नेता, FIR दर्ज करने की मांग

इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने राफेल मामले में सोमवार (24 सितंबर) को केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) के वी चौधरी से मुलाकात कर आग्रह किया कि इस विमान सौदे में हुए कथित ‘भ्रष्टाचार’ को लेकर मामला दर्ज किया जाए और इससे संबंधित रिकॉर्ड की छानबीन की जाए ताकि ‘भ्रष्टाचार, सांठगांठ वाले पूंजीवाद (क्रोनी कैपिटलिज्म), कानून एवं प्रक्रिया के उल्लंघन तथा सरकारी खजाने को हुए नुकसान’ की बात जल्द से जल्द सार्वजनिक हो सके।

ओलांद के बयान से राजनीतिक भूचाल

आपको बता दें कि राफेल विमानों की खरीद को लेकर फ्रांसीसी अखबार ‘मीडियापार्ट’ में छपी फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के एक बयान ने भारत में राजनीतिक भूचाल ला दिया है। दरअसल, फ्रांसीसी मीडिया के मुताबिक ओलांद ने कथित तौर पर कहा है कि भारत सरकार ने 58,000 करोड़ रुपए के राफेल विमान सौदे में फ्रांस की विमान बनाने वाली कंपनी दसाल्ट एविएशन के ऑफसेट साझेदार के तौर पर अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस का नाम प्रस्तावित किया था और ऐसे में फ्रांस के पास कोई विकल्प नहीं था।

ओलांद के सनसनीखेज बयान से इस विवाद में एक नया मोड़ आ गया है, क्योंकि उनके हवाले से किया गया यह दावा मोदी सरकार के बयान से उलट है। भारत सरकार कहती रही है कि फ्रांसीसी कंपनी दसाल्ट एविएशन ने खुद अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस का चुनाव किया था। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अब तक यही कहती रही है कि उसे आधिकारिक रुप से इस बात की जानकारी नहीं थी कि दसाल्ट एविएशन ने इस करार की ऑफसेट शर्त को पूरा करने के लिए भारतीय साझेदार के तौर पर किसे चुना है।

मुश्किल में फंसी मोदी सरकार

ओलांद का बयान सामने आने के बाद विपक्षी पार्टियों ने राफेल करार को लेकर मोदी सरकार पर हमले तेज कर दिए हैं। वे करार में भारी अनियमितता और रिलायंस डिफेंस लिमिटेड को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाते रहे हैं। उनका कहना है कि एयरोस्पेस क्षेत्र में रिलायंस डिफेंस लिमिटेड को कोई अनुभव नहीं है, लेकिन फिर भी सरकार ने अनुबंध उसे दे दिया। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 अप्रैल 2015 को पेरिस में फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति ओलांद के साथ वार्ता करने के बाद 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के करार की घोषणा की थी।

कांग्रेस का आरोप है कि सरकार इस सौदे के माध्यम से रिलायंस डिफेंस को फायदा पहुंचा रही है। रिलायंस डिफेंस ने इस सौदे की ऑफसेट जरुरतों को पूरा करने के लिए दसाल्ट एविएशन के साथ संयुक्त उपक्रम स्थापित किया है। विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि रिलायंस डिफेंस 10 अप्रैल 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से राफेल करार की घोषणा किए जाने से महज 12 दिन पहले बनाई गई। हालांकि, रिलायंस ग्रुप ने आरोपों को नकारा है।

‘जनता का रिपोर्टर’ ने किया था खुलासा

गौरतलब है कि ‘जनता का रिपोर्टर’ ने राफेल सौदे को लेकर तीन भागों (पढ़िए पार्ट 1पार्ट 2 और पार्ट 3 में क्या हुआ था खुलासा) में बड़ा खुलासा किया था। जिसके बाद कांग्रेस और राहुल गांधी यह आरोप लगाते आ रहे हैं कि मोदी सरकार ने फ्रांस की कंपनी दसाल्ट से 36 राफेल लड़ाकू विमान की खरीद का जो सौदा किया है, उसका मूल्य पूर्ववर्ती यूपीए सरकार में विमानों की दर को लेकर बनी सहमति की तुलना में बहुत अधिक है। इससे सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

कांग्रेस का आरोप है कि सरकार हर विमान को 1670 करोड़ रुपये से अधिक की कीमत पर खरीद रही है, जबकि संप्रग सरकार के दौरान 526 करोड़ रुपये प्रति विमान की दर से 126 राफेल विमानों की खरीद की बात चल रही थी। साथ ही पार्टी ने यह भी दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सौदे को बदलवाया जिससे सरकारी उपक्रम हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) से ठेका लेकर रिलायंस डिफेंस को दिया गया।

 

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