क्या 2019 लोकसभा चुनाव से पहले टूट जाएगा NDA से एक और दल?, बिहार में उपेंद्र कुशवाहा की ‘खीर’ पर सियासत तेज

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कर्नाटक और उत्तर प्रदेश व बिहार सहित देश के कई राज्यों में पिछले दिनों मिली हार बाद 2019 लोकसभा चुनाव में एक बार फिर सत्ता हासिल करने के लिए जोर-शोर से जुटी केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अपने सहयोगियों को मनाने के लिए इन दिनों जद्दोजहद कर रही है। एकजुट विपक्ष के कारण मिली हार के बाद बीजेपी के सामने अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के अपने सहयोगियों को साथ जोड़े रखना सबसे बड़ी चुनौती है।

इस बीच लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी को बिहार में बड़ा झटका लग सकता है। एनडीए में सहयोगी और मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री राष्ट्रीय लोकतांत्रिक समता पार्टी (रालोसपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने 2019 लोकसभा चुनाव में आरजेडी के नेतृत्व में पनप रहे महागठबंधन में शामिल होने के संकेत दिए हैं। जी हां, कुशवाहा ने इशारे ही इशारे में एक बयान दिया है, जिससे उनके बारे में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। एक बार फिर उनके राजद के साथ जाने के कयास लगाए जा रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री के अनुसार अगर यदुवंशियों मतलब यादव का दूध और कुशवंशी मतलब कुशवाहा उसमें चावल मिलाए तो दुनिया का सबसे स्वादिष्ट खीर तैयार होगा। उधर बिना देर किए विधानसभा में नेता विपक्ष और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने तो ट्विटर पर केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा की ‘सियासी खीर’ के ‘आग्रह’ पर सकारात्मक जवाब भी दे दिया हैं। हालांकि राजग के अन्य घटक दलों बीजेपी, जदयू और लोजपा ने इसे ‘कहावत’ की संज्ञा दी है।

रालोसपा के बीपी मंडल जन्म शताब्दी समारोह पर शनिवार को पटना में एक कार्यक्रम में कुशवाहा ने कहा था अगर यदुवंशियों का दूध और कुशवंशियो का चावल मिल जाए तो खीर बन सकती है। उन्होंने कहा था कि लेकिन खीर के लिए छोटी जाति एवं दबे-कुचले समाज का पंचमेवा भी चाहिए तथा चीनी भी पंडित जी (ब्राहमण समुदाय) के यहां से मिल जाएगी और तुलसी चौधरी जी (रालोसपा के प्रदेश अध्यक्ष भूदेव चौधरी) के यहां से तब जो खीर जैसा स्वादिष्ट व्यंजन बन सकता है यही सामाजिक न्याय की परिभाषा है और सोशल जस्टिस के मसीहा बीपी मंडल भी ऐसी ही व्यवस्था चाहते थे।

कुशवाहा ने सामाजिक आर्थिक जनगणना की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की आवश्यकता जताते हुए कहा कि उनकी पार्टी इस जनगणना रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी मंडल कमीशन में 27 प्रतिशत का आरक्षण पूरा नही मिल रहा है, क्योंकि कुछ लोग गलत मंशा के इसे पूरा नही होने दे रहे हैं। रालोसपा के राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता अभयानंद सुमन से उनकी पार्टी के प्रमुख के उक्त बयान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हम राजग में हैं।

लोकतांत्रिक पद्धति में हर दल और उसके नेता अपने सामाजिक आधार का विस्तार करने के लिए विभिन्न वर्गों और समुदायों तक पहुंचने की कोशिश में लगे रहते हैं और उसी दिशा में उनका यह एक प्रयास रहा होगा। कुशवाहा, जिनके राजग में स्वयं को असहज महसूस करने और बिहार में विपक्षी राजद और कांग्रेस के महागठबंधन में जाने को लेकर समय समय पर चर्चाएं होती रही हैं, को अक्सर वे खारिज करते रहे हैं, पर गत सात जून को राजग के शीर्ष नेताओं के भोज में उनके शामिल नहीं होने पर उनके राजग से दूरियां बढने की अटकलें लगने पर उन्होंने व्यक्तिगत कारण से उसमें शामिल नहीं होने की बात कही थी।

तेजस्वी ने किया स्वागत

राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने ट्वीट कर कुशवाहा के उक्त बयान पर कहा कि नि:संदेह उपेन्द्र जी, स्वादिष्ट और पौष्टिक खीर श्रमशील लोगों की ज़रूरत है। पंचमेवा के स्वास्थ्यवर्धक गुण ना केवल शरीर बल्कि स्वस्थ समतामूलक समाज के निर्माण में भी ऊर्जा देते हैं। प्रेमभाव से बनाई गई खीर में पौष्टिकता, स्वाद और ऊर्जा की भरपूर मात्रा होती है। यह एक अच्छा व्यंजन है।

बता दें कि तेजस्वी प्रसाद यादव उपेंद्र कुशवाहा को अपने महागठबंधन में शामिल होने का कई बार न्योता दे चुके हैं। कुशवाह के सहयोगी दल बीजेपी, जदयू और लोजपा ने उनके बयान को एक ‘मुहावरे’ के तौर लिए जाने की बात करते हुए कहा कि उसका कोई और अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा कि कुशवाहा जी के बयान का जो भाव (अगले आम चुनाव में नए गठबंधन की ओर इशारा) निकाला जा रहा वह सही नहीं है।

उन्होंने कहा कि कुशवाहा जी कई बार यह कहते रहे हैं कि अगले आम चुनाव में नरेंद्र मोदी जी को फिर से प्रधानमंत्री बनाना है, ऐसे में उनका संकल्प तो यह है और बीच बीच में कही गई बातों का अलग अलग अर्थ निकाला जाना मुनासिब नहीं होगा। केंद्रीय मंत्री और लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान ने कहा कि कुशवाहा जी ने किसी और संदर्भ में उक्त बातें कही होंगी।

बिहार में जो राजग के चारों घटक दल (बीजेपी, जदयू, लोजपा और रालोसपा) हैं, एक साथ मिलकर अगला आम चुनाव लडेगी तथा बिहार की सभी 40 लोकसभा सीटें जीतेगी। जदयू प्रवक्ता और एमएलसी निराज कुमार ने कुशवाहा के उक्त बयान को एक ‘कहावत’ के रूप में लिए जाने की बाते करते कहा कि वह राजग में हैं और बिहार से जंगल राज (राजद के पिछले 15 सालों के शासन) को उखाड़ फेंकने में अहम भूमिका निभाई है।

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