सिडनी: टीम इंडिया के खिलाड़ियों ने हाथ में काली पट्टी बांधकर सचिन के गुरू आचरेकर को दी भावभीनी श्रृद्धांजलि

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क्रिकेट जगत को सचिन तेंदुलकर जैसा महान खिलाड़ी देने वाले मशहूर कोच रमाकांत आचरेकर का बुधवार (2 जनवरी) को निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। उनके एक परिजन के अनुसार पिछले कुछ दिनों से वह बढती उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे थे। आचरेकर ने अपने कैरियर में सिर्फ एक प्रथम श्रेणी मैच खेला लेकिन उन्हें सर डॉन ब्रेडमैन के बाद दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेटर तेंदुलकर को तलाशने और तराशने का श्रेय जाता है।

@BCCI

क्रिकेट को अलविदा कह चुके तेंदुलकर के नाम बल्लेबाजी के लगभग सारे रिकॉर्ड है। उन्होंने टेस्ट में सर्वाधिक 15921 और वनडे में सबसे ज्यादा 18426 रन बनाए हैं। आचरेकर उनके बचपन के कोच थे और तेंदुलकर ने अपने कैरियर में उनकी भूमिका का हमेशा उल्लेख किया है। आचरेकर शिवाजी पार्क में उन्हें क्रिकेट सिखाते थे। आचरेकर को 2010 में पद्मश्री से नवाजा गया था। तेंदुलकर के अलावा वह विनोद कांबली, प्रवीण आम्रे, समीर दिघे और बलविंदर सिंह संधू के भी कोच रहे।

आचरेकर को याद कर काली पट्टी बांधकर उतरे भारतीय खिलाड़ी

आचरेकर ने निधन पर कई दिग्गज खिलाड़ियों ने शोक व्यक्त किया। सिडनी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज का चौथा टेस्ट मैच खेल रही भारतीय क्रिकेट टीम ने भी आचरेकर को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। भारतीय टीम के सभी खिलाड़ी हाथ की बाजु पर काली पट्टी बांधकर मैदान पर उतरी।

बीसीसीआई ने ट्वीट कर इस बात की पुष्टि की कि विराट कोहली की कप्तानी वाली टीम आचरेकर के सम्मान में ऐसे उतरी है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने ट्वीट किया- ‘रामाकांत आचरेकर ने निधन पर उनके लिए अपना सम्मान व्यक्त करते हुए भारतीय टीम के खिलाड़ी आज मैदान पर काली पट्टी बांधकर उतरे।’

‘वेल प्लेड सर, आप जहां भी हैं और सिखाते रहें’

अपने बचपन के कोच रमाकांत आचरेकर को भावभीनी श्रृद्धांजलि देते हुए चैम्पियन क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने कहा, ‘‘आचरेकर सर की मौजूदगी से स्वर्ग में भी क्रिकेट धन्य हो गया होगा।’’ आचरेकर के सबसे काबिल शिष्य ने एक बयान में कहा, ‘‘उनके कई छात्रों की तरह मैने भी क्रिकेट का ककहरा सर के मार्गदर्शन में सीखा।’’ उन्होंने कहा ,‘‘मेरी जिंदगी में उनके योगदान को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उन्होंने वह नींव बनाई जिस पर मैं खड़ा हूं।’’

तेंदुलकर ने कहा, ‘‘पिछले महीने मैं सर से उनके कुछ छात्रों के साथ मिला और हमने कुछ समय साथ बिताया। हमने पुराने दौर को याद करके काफी ठहाके लगाए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आचरेकर सर ने हमें सीधा खेलने और जीने का महत्व बताया। हमें अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाने और अपने अनुभव को हमारे साथ बांटने के लिये धन्यवाद सर।’’ उन्होंने आगे लिखा, ‘‘वेल प्लेड सर। आप जहां भी हैं, वहां और सिखाते रहें।’’

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