योगी के मंत्री बोले- ‘ताजमहल’ को सात अजूबों में शामिल करने वाले लोग शाहजहां के ही मिजाज के होंगे

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दुनिया के सात अजूबों में शुमार भारत की धरोहर ताजमहल को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा राज्य की पर्यटन स्थल की सूची से बाहर किए जाने का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने एक विवादित बयान देकर इस मामले को और आगे बढ़ा दिया है।Taj Mahalयोगी के मंत्री लक्ष्मी नारायण ने कहा कि ताजमहल को एक राजा ने मोहब्बत में बनवाया था, इसके अलावा और क्या है उसमें? उन्होंने कहा कि ताजमहल किसी धर्म का प्रतीक नहीं है और न ही ताजमहल कभी धार्मिक कहा जा सकता है। जो भी ताजमहल को देखने जाता है वह उसकी खूबसूरती देखने जाता है।

मंत्री जी ने अपने बयान में ताजमहल को सात अजूबो में शामिल करने वाले लोगों को राजा शाहजहां के ही मिजाज का बताते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि ताजमहल को सात अजूबों में शामिल करने वाले लोग शाहजहां के ही मिजाज के होंगे। साथ ही कैबिनेट मंत्री ने ताजमहल को पर्यटन स्थल से बाहर करते हुए गुरु गोरखनाथ पीठ को इसमें शामिल करने की वकालत की।

उन्होंने आगरा को ताजनगरी कहे जाने पर भी एतराज जताया और कहा कि जो लोग ऐसा कहते है वह पश्चिमी सभ्यता से प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में चल रही सरकार राष्ट्रवादी और धर्म के अनुसार चलने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि यह सरकार धर्मनीति के आधार पर चलने वाली सरकार है।

मंत्री ने कहा कि इसलिए पर्यटन स्थलों की सूची में गुरु गोरखनाथपीठ को शामिल किया जाना चाहिए और ताजमहल को इस सूची से निकाल देना चाहिए। लक्ष्मी नारायण चौधरी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् द्वारा मेघावी छात्र छात्राओं को सम्मानित करने के लिए आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने हाथरस पहुंचे थे, जहां उन्होंने यह बातें कही।

क्या है मामला?

बता दें कि उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित यमुना नदी के किनारे सफेद पत्थरों से निर्मित अलौकिक सुंदरता की तस्वीर ‘ताजमहल’ न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में अपनी पहचान बना चुका है। लेकिन दुनिया के सात अजूबों में शुमार भारत की धरोहर ताजमहल को योगी सरकार ने अपने आधिकारिक पर्यटन स्थल की सूची से बाहर कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, योगी सरकार द्वारा यूपी पर्यटन की बनाई गई नई बुकलेट में ताजमहल को जगह नहीं दी गई है। दरअसल, यूपी में हर वर्ष पर्यटन मंत्रालय की आधिकारिक बुकलेट जारी होती है। लेकिन इस बार का बुकलेट विवादों में घिर गया है क्योंकि इसमें ताजमहल को जगह नहीं दी गई है।

गोरखनाथ मंदिर और अयोध्या को मिली जगह

इस बार के नई बुकलेट में गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर को विशेष तौर पर जगह दी गई है। इसके अलावा नाथ संप्रदाय से ही जुड़े यूपी के बलरामपुर में स्थित देवी पाटन शक्ति पीठ को भी स्थान दिया गया है। इस बार की बुकलेट का पहला पेज वाराणसी की गंगा आरती को समर्पित किया गया है।

इस बार के बुकलेट की खास बात यह है कि इस बार इसमें अयोध्या को भी शामिल किया गया है। बुकलेट के बारहवें और तेरहवें पेज में अयोध्या के बारे में विस्तार से जिक्र किया गया है। रामलीला के चित्रों को भी बुकलेट में खास तौर से जगह दी गई है। ईको टूरिज्म से लेकर मंदिर टूरिज्म तक को इस बुकलेट में जगह मिली है लेकिन ताजमहल को नहीं।

गंगा आरती के भव्य दृश्य के साथ दूसरे पेज में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी की तस्वीर है। इस तस्वीर के साथ बुकलेट का उद्देश्य लिखा है। उसके आगे पर्यटन विकास योजनाओं के बारे में दिया गया है। पहले पेज के साथ ही छठवां और सातवां पेज भी गंगा आरती को समर्पित किया गया है।

‘सांस्कृतिक विरासत’ से पहले ही कर चुके हैं बाहर

बता दें कि इससे पहले योगी सरकार ‘ताजमहल’ को भारत की ‘सांस्कृतिक विरासत’ मानने से इनकार कर दिया था।पिछले दिनों 11 जुलाई को योगी सरकार के वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए 3,84,659.71 करोड़ रुपये के बजट पेश किया, हालांकि इस पूरे बजट में ‘ताजमहल’ का कोई जिक्र नहीं था।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य के वित्त वर्ष 2017-18 के बजट में ‘हमारी सांस्कृतिक विरासत’ सेक्शन से ताजमहल गायब कर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, 63 पन्नों के इस बजट में ‘ताजमहल’ का एक बार भी जिक्र नहीं किया गया।

 

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