ताज महल के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को लगाई फटकार, कहा- ‘सहेज नहीं सकते, तो ध्वस्त कर दो’

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दुनिया के सात अजूबों में शामिल मोहब्बत की निशानी ताज महल के संरक्षण को लेकर उदासीन रवैया अपनाने पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (11 जुलाई) को केंद्र की नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा कि मुगल काल की इस ऐतिहासिक इमारत के संरक्षण को लेकर कोई उम्मीद नजर नहीं आती है। शीर्ष अदालत ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि उत्तर प्रदेश सरकार ताज महल की सुरक्षा और उसके संरक्षण को लेकर विजन डॉक्यूमेंट सामने रखने में विफल रही है।

(AFP/File Photo)

समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि प्रशासन ताजमहल को ठीक से संरक्षित करे, या फिर उसे ढहा दें, नहीं तो न्यायालय उसे बंद कर देगी। दरअसल शीर्ष अदालत उत्तर प्रदेश सरकार के ताजमहल को संरक्षित करने के लिए विजन दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहने से नाराज है। न्यायमूर्ति मदन बी.लोकुर व न्यायमूर्ति दीपक प्रशासन की तरफ से ताजमहल के संरक्षण के लिए कोई कदम नहीं उठाने से खफा थे और उन्होंने कहा कि यह सरकार की सरासर लापरवाही है।

सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने कहा, ताजमहल को संरक्षित करने की बिल्कुल इच्छा नहीं है। ताजमहल को संरक्षित किया जाना चाहिए। या तो हम इसे बंद कर देंगे या आप इसे ढहा दें या इसे संरक्षित करें। अदालत ने कहा कि ताजमहल एफिल टॉवर से ज्यादा सुंदर है और यह देश की विदेशी मुद्रा की समस्या को हल कर सकता है। अदालत ने कहा, एफिल टॉवर को आठ करोड़ लोग देखने जाते हैं, जो कि टीवी के एक टॉवर जैसा दिखता है। हमारा ताजमहल बहुत ज्यादा खूबसूरत है। यदि आप इसकी देखभाल करेंगे तो इससे आपकी विदेशी मुद्रा की समस्या हल होगी।

खंडपीठ ने कहा, क्या आपको इस बात का अहसास है कि आपकी लापरवाही से देश को किनता नुकसान हुआ है? उत्तर प्रदेश सरकार ने इससे पहले खंडपीठ से कहा था कि वह अदालत के समक्ष ताजमहल की सुरक्षा व संरक्षा के लिए एक विजन दस्तावेज प्रस्तुत करेगी। ताजमहल को मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में बनवाया था। अदालत ने कहा कि वह मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को दैनिक आधार पर करेगी। खंडपीठ ने केंद्र से उठाए गए कदमों का पूरा विवरण प्रस्तुत करने को कहा और ताजमहल की सुरक्षा के इरादे से कार्रवाई करने को कहा।

शीर्ष अदालत ने ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) के चेयरमैन को जोन में औद्योगिक इकाइयों के विस्तार को रोकने के आदेश के उल्लंघन को लेकर स्पष्टीकरण देने के लिए व्यक्तिगत तौर पर उपस्थिति होने का आदेश दिया। टीटीजेड 10,400 वर्ग किमी का इलाका है, जो उत्तर प्रदेश के आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस व एटा व राजस्थान के भरतपुर तक फैला हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा था कि वह ताजमहल के चारों तरफ पर्यावरण की देखभाल की कोशिश कर रही है, जिससे ऐतिहासिक इमारत 400 सालों तक बनी रहे, सिर्फ एक पीढ़ी तक नहीं।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि इस महत्वपूर्ण स्मारक के संरक्षण को लेकर क्या कदम उठाए गए हैं और किस तरह की कार्रवाई की जरूरत है, इस बारे में वह विस्तृत जानकारी पेश करे। जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि ताज महल के संरक्षण के बारे में संसद की स्थाई समिति की रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।

सुनवाई के दौरान केंद्र ने कोर्ट को बताया कि आईआईटी कानपुर ताज महल और उसके आसपास वायु प्रदूषण के स्तर का आकलन कर रहा है और चार महीने में अपनी रिपोर्ट देगा। केंद्र सरकार की ओर से यह जानकारी भी दी गई कि ताज महल और उसके आसपास प्रदूषण के स्रोत का पता लगाने के लिए एक विशेष समिति का भी गठन किया गया है जो इस विश्व प्रसिद्ध स्मारक के संरक्षण के उपाय सुझाएगी। अदालत पर्यावरणविद एम.सी.मेहता द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही है। मेहता ने प्रदूषणकारी गैसों के प्रभाव से और इलाके में पेड़ों की कटाई रोककर ताज को बचाने की मांग की है।

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