EXCLUSIVE: नफरत फैलाने वाला फर्जी बयान शेयर किए जाने को लेकर CM योगी के संगठन हिंदू युवा वाहिनी के खिलाफ आपराधिक केस करेंगी RLD सांसद तबस्सुम हसन

0

उत्तर प्रदेश में कैराना लोकसभा सीट से उपचुनाव में जीत दर्ज करने वाली राष्ट्रीय लोकदल (आरएलएडी) की उम्मीदवार तबस्सुम हसन के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थकों द्वारा दो समुदाय के बीच नफरत फैलाने वाला एक फर्जी मैसेज सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। दरअसल, इस सीट को राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था। यही वजह है कि यहां हार से निराश बीजेपी समर्थकों का एक समूह अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर लोगों का ध्यान भटकाने के लिए सांप्रदायिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

File Photo: PTI

बता दें कि कैराना लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस, सपा, बीएसपी और आम आदमी पार्टी के समर्थन से मैदान में उतरीं आरएलएडी प्रत्याशी तबस्सुम हसन ने बीजेपी प्रत्याशी मृगांका सिंह को मात दी है। लेकिन मृगांका सिंह की हार के बाद तबस्सुम हसन के खिलाफ तरफ-तरफ से झूठी अफवाहें फैलाई जा रही हैं। बीजेपी समर्थक ट्रोलर्स द्वारा सोशल मीडिया के सभी प्लेटफॉर्म फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप्प हसन के नाम से जमकर फर्जी मैसेज शेयर किया जा रहा है।

वायरल फोटो में सबसे ऊपर कैराना से चुनाव जीतने वाली आरएलडी यानि राष्ट्रीय लोक दल की तबस्सुम हसन दिख रही हैं। फोटो के नीचे एक मैसेज लिखा है, ‘ये अल्लाह की जीत है और राम की हार, तबस्सुम बेगम, आरएलडी, कैराना।’ ‘कमल त्यागी BJP’ के नाम से बने एक फेसबुक अकाउंट से शेयर किया गया है जिसमें लिखा है, “आज वाकई बड़ा खुश हूं… कैराना की हार पर सुबह दुख था…लेकिन जैसे ही कैराना से सांसद चुनी गई तसव्वुर बेगम ने कहा
“यह इस्लाम की जीत है और हिंदुओं की हार है”

 

मजा आ गया, वाकई मजा आ गया, यह उन लोगों के लिए मुंह पर तमाचा था, जो मोदी के विरोध में और जाति की राजनीति को स्थापित करने के लिए तसव्वुर बेगम को वोट दे आए थे और उन तसव्वुर बेगम ने 1 मिनट में उनके भाईचारे में से भाई निकाल कर के उन्हें चारा बना दिया और उनकी औकात दिखा दी, वाकई मजा आ गया, तसव्वुर बेगम को यही बयान देना चाहिए था।”

त्यागी के इस पोस्ट को खबर लिखे जाने तक करीब 1100 लोग शेयर कर चुके हैं। तबस्सुम हसन के इस फर्जी बयान को कई बीजेपी समर्थक पेजों से पोस्ट किया गया है जिसमें एक Yogi Adityanath– True Indian पेज भी शामिल है। इस पेज ने 1 जून को यह पोस्ट किया है जिसे इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक 4500 से ज्यादा बार शेयर किया जा चूका है। इस फर्जी बयान को ट्विटर और व्हाट्सएप पर भी व्यापक रूप से शेयर किया जा रहा है।

‘जनता का रिपोर्टर’ ने तबस्सुम हसन से संपर्क किया जिसके बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। ‘जनता का रिपोर्टर’ से बात करते हुए नव निर्वाचित सांसद ने कहा, ”क्या इस्लाम और राम की कोई लड़ाई चल रही है जो जीत और हार होगी? ये तो उन (बीजेपी और उनके समर्थक) लोगों का प्रोपेगेंडा है जो ऐसी मानसिकता रखते हैं। हम कभी भी ऐसा नहीं कर सकते कि किसी भी धर्म को बुरी बात कहें। आगे ये (बीजेपी) और क्या कर सकते हैं? जब भी इन्हें अपनी मुंह की खानी पड़ी ऐसी ताकतों को इसी तरह से 2019 का रास्ता बनाएंगे। कोई नहीं कह सकता कि मेरे परिवार का कोई आदमी ऐसी कोई हरकत कर सकता है।”

नवनिर्वाचित सांसद हसन ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संगठन हिन्दू युवा वाहिनी के नेताओं पर यह झूठी खबर फैलाने का आरोप लगाई हैं। उन्होंने दावा किया है कि उनके खिलाफ प्रोपेगेंडा हिन्दू युवा वाहिनी के सदस्यों द्वारा शेयर किया जा रहा है। तबस्सुम हसन ने कहा कि मेरे नाम पर लोगों के बीच नफरत फैलाने वाले इस फर्जी बयान को फैलाए जाने को लेकर वह हिन्दू युवा वाहिनी के खिलाफ पुलिस में आपराधिक मामला दर्ज कराएंगी।

बता दें कि हिंदू युवा वाहिनी संगठन के संस्थापक यूपी के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। गोरखपुर से सटे हुए कई जिलों में हिंदू युवा वाहिनी काफी सक्रिय है। लेकिन योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह संगठन पूरे राज्य में अपनी सक्रियता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। हिंदू युवा वाहिनी का गठन योगी आदित्यनाथ ने 2002 में किया था। वह इसके संरक्षक हैं।

लोकसभा में उत्तर प्रदेश से आने वालीं पहली मुस्लिम सांसद बनीं तबस्सुम हसन

बता दें कि उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में जीत के साथ राष्ट्रीय लोकदल (रालोद)-समाजवादी पार्टी (सपा) गठबंधन की प्रत्याशी तबस्सुम हसन 16वीं लोकसभा में इस राज्य से पहली मुस्लिम सांसद बन गयीं हैं। गोरखपुर और फूलपुर जैसी प्रतिष्ठापूर्ण सीटों पर हाल में हुए उपचुनाव में सपा के हाथों मिली पराजय के बाद हुए कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा सीटों के उपचुनाव में भी सत्तारुढ़ भाजपा को झटका लगा है। मुस्लिम और दलित बहुल कैराना सीट पर रालोद-सपा गठबंधन की प्रत्याशी तबस्सुम ने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा की मृगांका सिंह को 44618 मतों से पराजित किया।

इस तरह 16वीं लोकसभा में उत्तर प्रदेश से वह पहली मुस्लिम सांसद भी बन गयीं। बता दें कि वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में ‘मोदी की आंधी‘ के चलते भाजपा ने प्रदेश में सर्वाधिक 71 सांसदों को विजय मिली थी, जबकि कांग्रेस पार्टी को 2, एसपी को 5 और बीजेपी की सहयोगी अपना दल को 2 सीटों पर विजय हासिल हुई थी। उस चुनाव में इस सूबे से एक भी मुस्लिम प्रत्याशी नहीं जीत सका था। बता दें कि वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में ‘मोदी लहर’ और राजनीतिक रूप से खासा दबदबा रखने वाले मुनव्वर हसन के परिवार में वोटों के बंटवारे के बीच भाजपा के हुकुम सिंह ने कैराना लोकसभा सीट जीती थी।

सिंह के निधन के बाद यह सीट रिक्त हुई थी. कैराना लोकसभा क्षेत्र में लगभग 17 लाख मतदाता हैं। इनमें तीन लाख मुसलमान, लगभग चार लाख पिछड़े और करीब डेढ़ लाख वोट जाटव दलितों के हैं, जो बसपा का परम्परागत वोट बैंक माना जाता है। यहां यादव मतदाताओं की संख्या कम है ऐसे में यहां दलित और मुस्लिम मतदाता खासे महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इस क्षेत्र में हसन परिवार का खासा राजनीतिक दबदबा माना जाता रहा है। वर्ष 1996 में इस सीट से सपा के टिकट पर सांसद चुने गये मुनव्वर हसन की पत्नी तबस्सुम बेगम वर्ष 2009 में इस सीट से संसद जा चुकी हैं।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में इस परिवार में टूट हुई थी. तब मुनव्वर के बेटे नाहीद हसन सपा के टिकट पर और उनके चाचा कंवर हसन बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे, मगर दोनों को पराजय का सामना करना पड़ा था। हालांकि, नाहीद दूसरे स्थान पर रहे थे। इस सीट पर रालोद का भी दबदबा रहा है और 1999 तथा 2004 के लोकसभा चुनाव में उसके प्रत्याशी यहां से सांसद रह चुके हैं। रालोद ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में विपक्ष का साथ दिया था। कैराना में सपा, बसपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी तथा अन्य कई विपक्षी दलों ने रालोद प्रत्याशी का सहयोग किया था। भाजपा ने करीब दो साल पहले कैराना से बहुसंख्यक वर्ग के परिवारों के ‘पलायन’ का मुद्दा उठाया था।

भाजपा ने पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव के लिये अपने घोषणापत्र में इसे एक अहम मुद्दे के तौर पर शामिल किया था, लेकिन वह भाजपा के लिये फलीभूत नहीं हुआ था और कैराना विधानसभा सीट से हुकुम सिंह की बेटी भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह को पराजय का सामना करना पड़ा था। कैराना लोकसभा सीट पिछले करीब दो दशकों से अलग-अलग राजनीतिक दलों के खाते में जाती रही है। वर्ष 1996 में सपा, 1998 में भाजपा, 1999 और 2004 में रालोद, 2009 में बसपा और 2014 में भाजपा का इस पर कब्जा रहा। अब यह सीट फिर रालोद की झोली में जा चुकी है।

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here