शाहीन बाग के प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सार्वजनिक स्थलों को अनिश्चितकाल तक के लिए नहीं घेरा जा सकता

0

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (7 अक्टूबर) को कहा कि विरोध प्रदर्शन के लिए शाहीन बाग जैसे सार्वजनिक स्थलों पर कब्जा करना स्वीकार्य नहीं है और इस प्रकार के स्थानों पर ‘‘अनिश्चितकाल’’ के लिए कब्जा नहीं किया जा सकता। सीएए विरोधी प्रदर्शनों के खिलाफ दायर याचिका पर शीर्ष अदालत ने यह फैसला सुनाया। इन प्रदर्शनों के कारण कई महीने तक राष्ट्रीय राजधानी के शाहीन बाग इलाके में एक सड़क बाधित हो गई थी।

शाहीन बाग

न्यायमूर्ति एस के कौल की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं किया जा सकता, जैसा कि शाहीन बाग में विरोध प्रदर्शन के दौरान हुआ। पीठ ने साथ ही किया कि शाहीन बाग इलाके से लोगों को हटाने के लिए दिल्ली पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए थी। उसने कहा, ‘‘लोकतंत्र और असहमति साथ-साथ चलते हैं।’’ उसने कहा कि प्राधिकारियों को इस प्रकार के हालात से निपटने के लिए खुद कार्रवाई करनी होगी और वे अदालतों के पीछे छिप नहीं सकते।

वकील अमित साहनी ने सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों द्वारा शाहीन बाग में सड़क बाधित किए जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी। इसी याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने फैसला सुनाया।

बता दें कि, नागरिकता कानून के विरोध में शाहीन बाग में 100 दिनों से ज्यादा दिन तक लोग धरने पर बैठे थे। लेकिन कोरोना वायरस के कारण दिल्ली में धारा 144 लागू होने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटा दिया था। शाहीन बाग प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने के लिए शीर्ष अदालत में भी अपील की गई थी। धरना के कारण कई सड़कों को बंद कर दिया गया था और लोगों को आवाजाही में दिक्कतें होती थीं। (इंपुट: भाषा के साथ)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here