‘रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक अर्नब गोस्वामी को सुप्रीम कोर्ट से झटका, FIR को रद्द करने और केस CBI को ट्रांसफर करने की याचिका खारिज की

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पालघर में दो साधुओं सहित तीन व्यक्तियों की पीट-पीट कर हत्या किए जाने की घटना के मामले में अपने कार्यक्रम में कथित टिप्पणियों की वजह से जांच का सामना कर रहे अंग्रेजी समाचार चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ के विवादास्पद एंकर और संस्थापक अर्नब गोस्वामी को प्राप्त अंतरिम संरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने तीन सप्ताह के लिए बढ़ा दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने केस को सीबीआई को सौंपे जाने की उनकी मांग को खारिज कर दिया।

अर्नब गोस्वामी

इसके अलावा कोर्ट ने पालघर मामले से संबंधित 21 अप्रैल के समाचार कार्यक्रम के सिलसिले में अर्नब गोस्वामी के खिलाफ दर्ज शुरुआती प्राथमिकी निरस्त करने से भी मना कर दिया। न्यायालय ने अर्नब गोस्वामी से कहा कि वे प्राथमिकी निरस्त कराने के लिए सक्षम अदालत जाएं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पत्रकारिता की आजादी बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी का मूल आधार है।

सुप्रीम कोर्ट ने रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी के खिलाफ अनेक राज्यों में दर्ज प्राथमिकियां रद्द करने की उनकी याचिका पर मंगलवार (19 मई) को सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया। बता दें कि, पालघर में भीड़ द्वारा साधुओं की पीट-पीटकर हत्या के मामले पर एक समाचार शो में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ कथित अपमानजनक बयान को लेकर अर्नब गोस्वामी के खिलाफ प्राथमिकियां दर्ज कराई गई हैं।

गौरतलब है कि, सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को निर्देश दिया था कि मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज नई प्राथमिकी में गोस्वामी के खिलाफ कोई निरोधक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने उनकी दोनों याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था।

गोस्वामी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया था कि मुंबई पुलिस ने कथित मानहानि वाले बयानों के संबंध में दर्ज प्राथमिकी के सिलसिले में उनसे 12 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की थी और उनके खिलाफ मामले में जांच कर रहे दो अधिकारियों में से एक को कोविड-19 के संक्रमण की पुष्टि हुई है।

बता दें कि, महाराष्ट्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया था कि गोस्वामी सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्राप्त संरक्षण का दुरुपयोग कर रहे हैं और पुलिस को धमका रहे हैं। गोस्वामी की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने सुनवाई के दौरान दलील दी थी कि पूरा मामला एक राजनीतक दल द्वारा एक पत्रकार को निशाना बनाने का है।

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