सुप्रीम कोर्ट ने 2009 के अवमानना मामले में प्रशांत भूषण का स्पष्टीकरण किया नामंजूर, जारी रहेगी सुनवाई

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सुप्रीम कोर्ट ने 11 साल पुराने अवमानना मामले में जाने माने वकील प्रशांत भूषण का स्पष्टीकरण नामंजूर करते हुए गुण-दोष के आधार पर सुनवाई करने का सोमवार को निर्णय लिया। इसके साथ ही, भूषण के खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला जारी रहेगा। अब इस मामले की सुनवाई 17 अगस्त को होगी।

सुप्रीम कोर्ट

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा, “हमें इस बात को (कानून की कसौटी पर) परखने की जरूरत है कि भूषण का भ्रष्टाचार को लेकर दिया गया बयान अदालत की अवमानना का मामला बनता है या नहीं? इस प्रकार इस मामले की सुनवाई करना जरूरी है।”

न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 अगस्त की तारीख मुकर्रर की। भूषण ने अदालत कक्ष में फिर से परम्परागत तरीके से सुनवाई शुरू होने के बाद मामले को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया, लेकिन इसे ठुकरा दिया गया।

भूषण के पिता और पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण ने न्यायालय से अपनी बातें रखने की इजाजत मांगी, लेकिन न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि वह 17 अगस्त को सुनवाई के दौरान उन्हें अपनी बात रखने का मौका देंगे। न्यायालय ने गत चार अगस्त को इस मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया था। यह मामला तहलका पत्रिका में प्रकाशित भूषण के साक्षात्कार से है, जिसमें उन्होंने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार संबंधी बयान दिये थे।

बता दें कि, प्रशांत भूषण अदालत की एक और अवमानना मामले का सामना कर रहे हैं। उन्होंने मौजूदा चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की एक तस्वीर पर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने ट्विटर पर चीफ जस्टिस के खिलाफ टिप्पणी की। साथ ही एक और ट्वीट के जरिए उन्होंने कहा था कि देश के पिछले चार मुख्य न्यायाधीशों पर निशना साधा था। हाल ही में किए गए दोनों पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण को कंटेप्ट मामले में नोटिस जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत भूषण ने अपने जवाब में कहा था कि चीफ जस्टिस की स्वस्थ आलोचना अवमानना नहीं है।(इंपुट: एजेंसी के साथ)

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