सुप्रीम कोर्ट ने असम NRC प्रमुख प्रतीक हजेला को मध्य प्रदेश स्थानांतरित करने का दिया आदेश

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र एवं राज्य सरकार को शुक्रवार (8 अक्टूबर) को आदेश दिया कि वह असम राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के प्रमुख प्रतीक हजेला को अधिकतम समय के लिए मध्य प्रदेश स्थानांतरित करें। भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने केंद्र सरकार को अगले सात दिनों के भीतर उसके स्थानांतरण पर आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।

प्रतीक हजेला

कोर्ट के इस आदेश पर सरकार के वकील अटॉर्नी जरलन केके वेणुगोपाल ने जब कोर्ट से पूछा कि क्या इस ट्रांसफर की कोई वजह है तो इसपर चीफ जस्टिस ने सख्त लहजे में जवाब दिया। अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से पूछा, “क्या हजेला के ट्रांसफर का कोई विशेष कारण है?” लाइव लॉ की वेबसाइट के अनुसार, इस पर CJI रंजन गोगोई ने उत्तर दिया, “क्या कोई आदेश बिना किसी आधार के हो सकता है?”

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एस ए बोबडे एवं न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन की विशेष पीठ ने हजेला का प्रतिनियुक्ति पर अंतरकाडर स्थानांतरण करने का आदेश दिया। ख़बरों के मुताबिक, यह आदेश स्पष्ट रूप से हजेला को खतरे की आशंका के मद्देनजर दिया गया है।

साल 1995 बैच के असम और मेघालय काडर के 48 साल के आईएएस अधिकारी प्रतीक हजेला को असम में संसोधित नागरिकता लिस्ट बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हजेला ने असम एनआरसी को अंतिम रूप देने और उसके प्रकाशन की प्रक्रिया की निगरानी की थी।

बता दें कि, 31 अगस्त को एनआरसी की अंतिम सूची जारी की गई थी, जिसमें 3.01 करोड़ लोगों को शामिल किया गया, जबकि 19 लाख से ज्यादा लोगों को छोड़ दिया गया। इसके बाद से ही एनआरसी पर विवाद पैदा हो गया था। कई लोगों का कहना था कि सही दस्तावेज होने के बावजूद अधिकारियों ने उन्हें लिस्ट में शामिल नहीं किया। इतना ही नहीं, इस पर सत्तारूढ़ बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई और कहा कि सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है।

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