राफेल विवाद: अवमानना मामले में BJP सांसद मीनाक्षी लेखी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को भेजा नोटिस, 22 अप्रैल तक देना होगा जवाब

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राफेल डील से जुड़े अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को नोटिस जारी करते हुए 22 अप्रैल तक जवाब देने को कहा है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच ने अगले सोमवार यानी 22 अप्रैल तक राहुल गांधी से जवाब मांगा है। आपको बता दें कि राहुल गांधी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के बयान को गलत तरह से पेश करने का आरोप है। राहुल गांधी पर आरोप है कि उन्होंने एक बयान में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने माना कि चौकीदार ही चौर है।

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बता दें कि बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने राफेल सौदे पर हाल ही में दिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की शुक्रवार (12 अप्रैल) को उच्चतम न्यायालय में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट अब लेखी की अदालत की अवमानना याचिका पर सोमवार को सुनवाई की।

लेखी ने राहुल गांधी के उस कथित बयान को लेकर अवमानना याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने कहा था, “सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि चौकीदार चोर है।”  लेखी ने राहुल गांधी के उस कथित बयान को लेकर अवमानना याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने कहा था, “सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि चौकीदार चोर है।”

लेखी का आरोप है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के हवाले से ये बयान दिया है कि ‘सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि चौकीदार चोर है। लेखी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि कि राहुल गांधी ने अपनी निजी टिप्पणियों को शीर्ष अदालत द्वारा किया गया बताया और लोगों के मन में गलत धारणा पैदा करने की कोशिश की।

लेखी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने 12 अप्रैल को याचिका दायर करते हुए पीठ से कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने टिप्पणी की थी कि ‘‘अब सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया, चौकीदार चोर है।’’ रिपोर्ट्स के मुताबिक, गांधी ने कहा था, “पूरा देश यह कह रहा है कि चौकीदार चोर है। यह उत्सव का दिन है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में न्याय किया है।”

सोशल मीडिया पर कुछ वायरल वीडियो के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था, “सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया है कि राफेल में कुछ भ्रष्टाचार हुआ है और यह भी मान लिया है कि चौकीदार ने ही चोरी करवाई है। गांधी का यह कथित बयान अमेठी में नामांकन दाखिल करने के क्रम में आया था।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन पहले ही बुधवार को राफेल सौदे से संबंधित कुछ नए दस्तावेजों को आधार बनाए जाने पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की प्रारंभिक आपत्ति को ठुकरा दिया था। इन दस्तावेजों पर केंद्र सरकार ने ‘‘विशेषाधिकार’’ का दावा किया था।

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