राफेल मामल: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को जारी किया अवमानना का नोटिस

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सुप्रीम कोर्ट ने राफेल फैसले पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की टिप्पणियों को लेकर मंगलवार (23 अप्रैल) को उन्हें अवमानना का नोटिस जारी किया। गांधी की टिप्पणियों के बारे में शीर्ष अदालत ने कहा था कि इसे ‘‘गलत तरीके से उसके हवाले से बताया गया’’ है। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए दायर याचिका पर 30 अप्रैल को राफेल सौदे पर उसके 14 दिसंबर, 2018 के फैसले पर पुनर्विचार के लिए दायर याचिका के साथ ही सुनवाई करेगी।

राहुल गांधी

न्यायालय ने लेखी द्वारा दायर आपराधिक अवमानना का मामला खत्म करने का राहुल गांधी का अनुरोध ठुकरा दिया।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘अवमानना याचिका पर गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी को सुनने के बाद हम प्रतिवादी (राहुल) गांधी को नोटिस जारी करना उचित समझते हैं।’’ पीठ ने कहा, ‘‘हम रजिस्ट्री को निर्देश देते हैं कि पुनर्विचार याचिका को अवमानना याचिका के साथ अगले मंगलवार को सूचीबद्ध करे।’’

राहुल गांधी जता चुके हैं खेद

इससे पहले सोमवार (22 अप्रैल) को राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर राफेल मामले में शीर्ष अदालत के फैसले पर की गई अपनी टिप्पणी के लिए खेद जताया था। शीर्ष अदालत ने 15 अप्रैल को स्पष्ट किया था कि राफेल पर उसके फैसले में ऐसा कुछ भी नहीं था जिसके हवाले से यह कहा जा सके कि ‘चौकीदार नरेंद्र मोदी चोर हैं’। राहुल गांधी ने न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि अब शीर्ष अदालत भी मानती है कि ‘चौकीदार चोर है।’’

शीर्ष अदालत ने इस संबंध में भारतीय जनता पार्टी की सांसद और वकील मीनाक्षी लेखी की ओर से दायर अवमानना याचिका पर गांधी से स्पष्टीकरण मांगा था। शीर्ष अदालत के निर्देश पर दायर हलफनामे में गांधी ने कहा था कि उन्होंने चुनाव प्रचार के जोश में वह टिप्पणी की जिसका प्रतिद्वंद्वियों ने दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि उनकी मंशा न्यायालय का सम्मान कम करने की कत्तई नहीं थी।

हालांकि, गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राफेल पर कोर्ट के फैसले का इस्तेमाल कर उनकी सरकार को क्लीन चिट मिलने का दावा किया है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पीठ ने स्पष्ट किया था कि राफेल फैसले पर मीडिया में आई गांधी की टिप्पणी में गलत तरीके से सुप्रीम कोर्ट का हवाला दिया गया था। पीठ ने कहा था कि किसी भी नेता को अदालती फैसले या उसके आदेश को अपने भाषण में शामिल नहीं करना चाहिए। (इनपुट- भाषा के साथ)

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