राफेल सौदा विवाद LIVE: मोदी सरकार की तरफ से दिए कीमत के ब्यौरे पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई जारी

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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने वायु सेना के लिए 36 राफेल लड़ाकू विमान सौदे की कीमत का जो ब्योरा सील बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपा हैं, उस पर सुनवाई जारी है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसके कौल एवं न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ इस मामले में अहम सुनवाई कर रही है, जिसमें याचिकाकर्ता अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने सौदे की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की है।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए मोदी सरकार ने राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की कीमत का ब्योरा सोमवार (12 नवंबर) को सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंप दिया। राफेल की कीमतों का खुलासा करने से इनकार करने के बाद केंद्र सरकार ने सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को इस बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने राफेल की खरीद प्रक्रिया में उठाए गए कदमों के विवरण संबंधी दस्तावेज याचिकाकर्ताओं को भी सौंपे थे।

देखिए, लाइव अपडेट्स:-

  • राफेल पर सुनवाई LIVE: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि फ्रांसीसी सरकार ने 36 राफेल विमानों की कोई गारंटी नहीं दी है, लेकिन फ्रांस के प्रधानमंत्री ने लेटर ऑफ कम्फर्ट जरूर दिया है।
  • राफेल पर सुनवाई LIVE: सुप्रीम कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव से पूछा कि 2015 में ऑफसेट नियमों में क्यों बदलाव किया गया? इसमें देशहित क्या है? अगर ऑफसेट पार्टनर कोई उत्पादन नहीं करते तो क्या किया जाएगा?
  • सुप्रीम कोर्ट 2015 के ऑफसेट नियमों के बारे में पूछा। रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव ने ऑफसेट नियमों की जानकारी दी और कहा कि वर्तमान में मुख्य कॉन्ट्रैक्ट के साथ ही ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट भी होता है।
  • राफेल पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई LIVE: केंद्र सरकार की ओर से एजी केके वेणुगोपाल ने कहा, ‘केवल प्लेन की कीमतों का खुलासा संसद में किया गया था लेकिन हथियारों से लदे राफेल की कीमतों का खुलासा किसी भी मंच पर नहीं किया गया है।’
  • CJI रंजन गोगोई ने AG केके वेणुगोपाल से पूछा कि क्या कोर्ट में भारतीय वायुसेना का कोई अधिकारी मौजूद है जो मामले पर उठे सवालों के संदर्भ में जवाब दे सके? आखिरकार हम वायुसेना के मामले के बारे में बातचीत कर रहे हैं इसलिए हमें उनसे पूंछना चाहिए।
  • राफेल पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई LIVE: याचिकाकर्ता अरुण शौरी ने कहा कि तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने खुद घोषणा की थी कि राफेल डील PM मोदी का निर्णय था। यह दिखाता है कि रक्षा मंत्रालय लूप में नहीं था।
  • राफेल पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई LIVE: याचिकाकर्ता अरुण शौरी ने राफेल सौदे और कीमत न बताने पर उठाया सवाल।
  • राफेल सौदा विवाद LIVE: प्रशांत भूषण ने कहा कि राफेल मामले में CBI जांच होनी चाहिए। इसमें रक्षा सौदे की तय प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ है।
  • राफेल सौदा विवाद LIVE: वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि संसद में खुद कीमत का ऐलान करने के बाद सरकार अब कीमतों पर सीक्रसी ईशू का तर्क नहीं दे सकती। सरकार का यह कहना भी यह एक बोगस क्लेम है। नई डील की कीमत 40 प्रतिशत ज्यादा है।
  • राफेल सौदा विवाद LIVE: वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार ने ऑफसेट प्रावधान को 2015 में बदल दिया और डसॉल्ट को ऑफसेट पार्टनर चुनने का अधिकार दे दिया और बाद में यह कहने लगी कि हमें नहीं पता कि ऑफसेट पार्टनर कैसे चयनित हुआ, पुराने प्रावधान में यह पार्टनर सरकार की मर्जी से चुना जाता था।
  • राफेल सौदा विवाद LIVE: वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि फ्रांससी सरकार की ओर से डील के सबंध में कोई सॉवरेन गारंटी नहीं थी। रक्षा मंत्री को सौदे में हुए बदलावों के बाद में पूरी जानकारी नहीं थी। 4 साल में एक भी विमान नहीं आया, देश के साथ राफेल डील के नाम पर धोखा हुआ है।
  • राफेल सौदा विवाद LIVE: वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- जो पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी (राफेल डील के याचिकाकर्ताओं में से एक) की तरफ से दलील दे रहे हैं ने कोर्ट को बताया कि केवल तीन परिस्थितियों में ही अंतर-सरकारी रास्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • राफेल डील केस: याचिकाकर्ता वकील एमएल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार द्वारा दाखिल की गई रिपोर्ट से यह पता चलता है कि मई 2015 के बाद निर्णय लेने में कई गंभीर घोटाले किए गए हैं। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि 5-जजों की बेंच इसपर सुनवाई करे।
  • AAP नेता संजय सिंह के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 36 राफेल विमानों की कीमतों का खुलासा ससंद में दो बार किया जा चुका है इसलिए सरकार के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया जा सकता कि कीमतों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट समेत सभी याचिकाकर्ताओं को यह भी बताया कि यह पूरा सौदा कैसे हुआ। सरकार ने विमान की कीमतों का ब्योरा सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपा था। याचिकाकर्ता दस्तावेजों में दर्ज बातों पर अपनी दलील दे सकते हैं। इससे पहले, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक 36 राफेल विमानों की खरीद के संबंध में किए गए फैसले के ब्योरे वाले दस्तावेज याचिकाकर्ताओं को सौंप दिए।

समाचार एजेंसी पीटीआई की खबर के मुताबिक दस्तावेजों के अनुसार राफेल विमानों की खरीद में रक्षा खरीद प्रक्रिया-2013 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया है। विमान के लिये रक्षा खरीद परिषद की मंजूरी ली गई और भारतीय दल ने फ्रांसीसी पक्ष के साथ बातचीत की। पीटीआई के मुताबिक दस्तावेजों में कहा गया है कि फ्रांसीसी पक्ष के साथ बातचीत तकरीबन एक साल चली और समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति की मंजूरी ली गई।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 31 अक्टूबर के सुनवाई को दौरान फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीद पर केंद्र सरकार से ब्योरा मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने एनडीए सरकार से कहा था कि वह 10 दिनों के भीतर राफेल लड़ाकू विमानों से जुड़े ब्यौरे बंद लिफाफे में सौपें। तब सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने अदालत से कहा था कि सरकार के लिए अदालत को कीमतों की जानकारी उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा क्योंकि यह जानकारी संसद को भी नहीं दी गई है।

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