सुप्रीम कोर्ट ने देशद्रोह के मामले में वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण की अवधि बढ़ाई

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सुप्रीम कोर्ट ने देशद्रोह के मामले में वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को उनके यूट्यूब के एक कार्यक्रम को लेकर हिमाचल प्रदेश पुलिस की किसी दंडात्मक कार्रवाई से मिले संरक्षण की अवधि सोमवार को अगले आदेश तक के लिए बढ़ा दी। विनोद दुआ के खिलाफ हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक स्थानीय नेता ने देशद्रोह का मामला दर्ज कराया है।

विनोद दुआ

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति उदय यू ललित और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने कहा कि विनोद दुआ को इस मामले के संबंध में हिमाचल प्र्रदेश पुलिस द्वारा पूछे जा रहे किसी भी पूरक प्रश्न का जवाब देने की जरूरत नहीं है। पीठ ने इस मामले को अब 27 जुलाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। इससे पहले 7 जुलाई को शीर्ष अदालत ने वरिष्ठ पत्रकार को संरक्षण दिया था और किसी भी आक्रामक कार्रवाई से राज्य पुलिस द्वारा अब तक की गई जांच पर एक सीलबंद कवर में रिपोर्ट मांगी थी।

भाजपा के स्थानीय नेता श्याम की शिकायत पर छह मई को शिमला के कुमारसेन थाने में विनोद दुआ के खिलाफ राजद्रोह, मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने और सार्वजनिक शरारत करने जैसे आरोपों में भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने विनोद दुआ को जांच में शामिल होने का निर्देश दिया था। श्याम का आरोप है कि विनोद दुआ ने अपने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री पर वोट हासिल करने के लिए मौत और आतंकी हमलों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर विनोद दुआ की याचिका पर 14 जून को रविवार के दिन सुनवाई करते हुए अगले आदेश तक उन्हें गिरफ्तार करने से हिमाचल प्रदेश पुलिस को रोक दिया था। न्यायालय ने सात जुलाई को विनोद दुआ को प्राप्त संरक्षण की अवधि पहले 15 जुलाई तक और फिर आज (20 जुलाई) तक के लिए बढ़ा दी थी। वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ ने अपनी याचिका में उनके खिलाफ प्राथमिकी निरस्त करने और उन्हें परेशान करने के कारण तगड़ा जुर्माना लगाने का अनुरोध न्यायालय से किया है।

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