दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में सुनवाई के दौरान वकील के उपस्थित नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

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सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत की घटना की अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच के लिए जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई के दौरान किसी भी वकील के पेश नहीं होने पर नाखुशी जताई।

दिशा सालियान

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने कहा, ‘‘इस मामले में कोई पेश नहीं हो रहा है? पिछली तारीख पर भी कोई पेश नहीं हुआ था? हमें क्या करना चाहिए? हमने पिछली तारीख पर ही कहा था कि आपको बंबई उच्च न्यायालय जाने के बारे में विचार करना चाहिए।’’ पीठ ने कहा, ‘‘मामले को दशहरा की छुट्टियों के बाद सूचीबद्ध किया जाए।’’ इस टिप्पणी के साथ ही पीठ ने वकील पुनीत कौर ढांडा की जनहित याचिका स्थगित कर दी।

दिशा सालियान की मौत की घटना की न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जांच के लिए दायर इस याचिका में यह अनुरोध भी किया गया है कि मुंबई के शीर्ष पुलिस अधिकारी को इस मामले की जांच की विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय में पेश करने का निर्देश दिया जाये। अधिवक्ता पुनीत कौर ढांडा के माध्यम से दायर इस याचिका में दावा किया गया है कि सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियान की मौत की घटनायें परस्पर जुड़ी हैं क्योंकि दोनों ही संदेहास्पद परिस्थितियों में हुई हैं।

याचिका के अनुसार, ‘‘सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद दिशा सालियान और सुशांत की मौत के बीच तरह-तरह की साजिश की कहानियों का बाजार गर्म है। दोनों ही अपने अपने क्षेत्र में सफलता की बुलंदी पर थे, जब उनकी मृत्यु हुयी।’’ बता दें कि, दिशा सालियान (28) की 8 जून को मुंबई के मलाड (पश्चिम) में एक रिहाइशी इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी।

वहीं, इसके कुछ दिनों बाद ही 14 जून को 34 वर्षीय सुशांत सिंह राजपूत मुंबई के उपनगर बांद्रा में अपने अपार्टमेन्ट की छत से लटके मिले। सुशांत की मौत के मामले की जांच शुरू में मुंबई पुलिस कर रही थी। बाद में अगस्त महीने में उच्चतम न्यायालय ने इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया था।

याचिका में कहा गया है कि अगर शीर्ष अदालत मुंबई पुलिस की जांच रिपोर्ट के अवलोकन के बाद उससे संतुष्ट नहीं होती है तो इसे सीबीआई को हस्तांतरित कर देना चाहिए। मामले में वकील विनीत ढांडा को जिरह करनी थी, जिन्होंने बाद में कहा कि वह कार्यवाही में उपस्थित हुए लेकिन तकनीकी खराबी के कारण इसमें शामिल नहीं हो सके।

ढांडा ने पीटीआई (भाषा) से कहा, ‘‘मैं दोनों तारीखों पर उपस्थित हुआ। मैं अदालत के मॉडरेटर के संपर्क में भी था। मैं सुबह से ही अदालत की कार्यवाही देख रहा था लेकिन उच्चतम न्यायालय की तकनीकी टीम ने वीडियो और ऑडियो को ब्लॉक कर दिया था।’’

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