पूर्व CJI रंजन गोगोई के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने उस याचिका पर विचार करने से शुक्रवार (21 अगस्त) को इनकार कर दिया जिसमें भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) के शीर्ष अदालत में न्यायाधीश पद पर रहने के दौरान आचरण की जांच के लिए तीन न्यायाधीशों के पैनल के गठन की मांग की गई थी। बता दें कि, रंजन गोगोई पिछले वर्ष 17 नवंबर को सेवानिवृत्त हो गए थे और वह अब राज्यसभा सदस्य हैं।

 रंजन गोगोई

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने उक्त जनहित याचिका को ‘‘गैरजरूरी’’ बताया और कहा कि याचिकाकर्ता ने बीते दो वर्ष में सुनवाई के लिए जोर नहीं दिया और वैसे भी न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजन गोगोई का कार्यकाल अब समाप्त हो चुका है।

पीठ ने कहा, ‘‘बीते दो साल में आपने (याचिकाकर्ता) सुनवाई के लिए जोर क्यों नहीं दिया? उनका कार्यकाल अब समाप्त हो चुका हैं इसलिए अब यह याचिका निरर्थक हो चुकी है।’’ न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी भी पीठ का हिस्सा हैं।

याचिकाकर्ता अरूण रामचंद्र हुबलीकर ने याचिका में न्यायमूर्ति गोगोई के कार्यकाल में कथित ‘अनियमितताओं’ की जांच करने की मांग की थी। हालांकि पीठ ने जवाब दिया, ‘‘माफ कीजिए, हम इस याचिका पर विचार नहीं कर सकते हैं।’’ याचिकाकर्ता ने पीठ के समक्ष दावा किया कि उन्होंने शीर्ष न्यायालय के महासचिव से मुलाकात कर याचिका को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

रंजन गोगोई 17 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। रंजन गोगोई की अगुआई वाली बेंच ने ही राम मंदिर मामले में फैसला सुनाया था। उन्होंने इस मामले में लगातार 40 दिनों तक सुनवाई कर केस का निपटारा किया था। न्यायमूर्ति गोगोई देश के 46वें प्रधान न्यायाधीश रहे। उन्होंने देश के प्रधान न्यायाधीश का पद तीन अक्टूबर 2018 से 17 नंवबर 2019 तक संभाला।

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