मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड: पूर्व मंत्री मंजू वर्मा की गिरफ्तारी न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश सरकार को लगाई फटकार, पूछा- क्यों नहीं किया गया गिरफ्तार?

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बिहार के बहुचर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड मामले में पूर्व मंत्री मंजू वर्मा की गिरफ्तारी न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (30 अक्टूबर) को नीतीश सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि अब तक उन्हें क्यों गिरफ्तार नहीं किया गया है? सुप्रीम कोर्ट ने बिहार पुलिस से पूछा कि मुजफ्फरपुर आश्रय गृह कांड के मद्देनजर इस्तीफा देने वाली बिहार की पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के घर से हथियार बरामद होने से संबंधित मामले में पूर्व मंत्री को क्यों नहीं गिरफ्तार किया गया है।

File Photo: PTI

आपको बता दें कि इसी आश्रय गृह में कई लड़कियों से कथित तौर पर बलात्कार हुआ था। पूर्व मंत्री वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा ने हथियार मामले में सोमवार को बेगूसराय की अदालत में आत्मसमर्पण किया था। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक न्यायमूर्ति एम. बी. लोकुर, न्यायमूर्ति एस. ए. नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि मुजफ्फरपुर आश्रय गृह यौन उत्पीड़न मामले में प्रमुख आरोपी ब्रजेश ठाकुर को बिहार की भागलपुर जेल से पंजाब में कड़ी सुरक्षा वाली पटियाला जेल भेजा जाए।

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) द्वारा राज्य के समाज कल्याण विभाग को सौंपी गई एक ऑडिट रिपोर्ट में यह मामला सबसे पहले प्रकाश में आया था। इससे पहले शीर्ष अदालत में मामले में जांच से संबंधित विस्तृत सूचनाओं को न्यायालय ने ‘‘भयावह’’ और ‘‘डरावना’’ बताया था। शीर्ष अदालत ने ठाकुर के खिलाफ सीबीआई द्वारा पेश आरोपों पर भी संज्ञान लिया और उन्हें नोटिस जारी कर यह पूछा था कि उन्हें राज्य से बाहर की जेल में क्यों भेजा जाना चाहिए।

सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि ठाकुर एक प्रभावशाली व्यक्ति है और जिस जेल के अंदर फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं, वहां उनके पास से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया था। समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, शीर्ष अदालत ने बिहार पुलिस से यह भी कहा कि वह भारी मात्रा में हथियार बरामदगी मामले में पूर्व मंत्री और उनके पति से पूछताछ करे।

मुजफ्फरपुर आश्रय गृह में यौन उत्पीड़न मामले के मद्देनजर बिहार सरकार में समाज कल्याण मंत्री रहीं वर्मा को इस्तीफा देना पड़ा था। शीर्ष अदालत ने 18 सितंबर को मामले में जांच के लिये सीबीआई की एक नयी टीम के गठन से संबंधित पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर यह कहकर रोक लगा दी कि इससे ना सिर्फ जारी जांच पर असर पड़ेगा बल्कि यह पीड़ितों के लिये भी नुकसानदायक होगा।

चिकित्सकीय जांच में आश्रय गृह की 42 में से 34 पीड़िताओं के यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई। टीआईएसएस की ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया कि आश्रय गृह की कई लड़कियों ने यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी। ठाकुर समेत 11 लोगों के खिलाफ 31 मई को प्राथमिकी दर्ज की गयी। बाद में इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गयी थी।

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