सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार से पूछा, ‘शहरी बेघरों के आधार कार्ड कैसे बने?’

0

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (10 जनवरी) को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार से जानना चाहा कि शहरी बेघरों के आधार कार्ड कैसे बन रहे हैं। न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने देश भर में शहरी बेघरों को बसेरे उपलब्ध कराने के लिये दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से यह जानकारी मांगी।

File Photo: PTI

न्यूज एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता से पीठ ने सवाल किया, यदि कोई व्यक्ति बेघर है तो आधार कार्ड में उसे कैसे वर्णित किया जाता है। मेहता ने इस सवाल के जवाब में शुरू में कहा, यही संभावना है कि उनके पास आधार नहीं होगा।

इस पर पीठ ने जानना चाहा कि क्या आधार कार्ड नहीं रखने वाले ऐसे बेघर लोग भारत सरकार या उत्तर प्रदेश सरकार के लिये अस्तित्व में ही नहीं है और उन्हें इन बसेरों में जगह नहीं मिलेगी। मेहता ने स्पष्टीकरण दिया कि यह कहना सही नहीं है कि जिनके पास आधार कार्ड नहीं है उनका अस्तित्व ही नहीं है, क्योंकि उनके पास मतदाता पहचान पत्र जैसे दूसरे पहचान संबंधी कार्ड हैं जिनमें उनका पता होता है।

मेहता ने कहा कि हम एक मानवीय समस्या से निबट रहे हैं। आधार के लिये स्थाई पता दिया जा सकता है। वे शहरी बेघर आने जाने वाली आबादी में आते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस स्थिति के प्रति सजग है और वह ऐसे सभी व्यक्तियों के लिये बसेरों में जगह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है। हालांकि न्यायालय ने कहा कि सरकार के मुताबिक देश की 90 प्रतिशत आबादी को आधार कार्ड दिया जा चुका है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here