सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से मांगी राफेल की खरीद प्रक्रिया की पूरी जानकारी, पूछा- कैसे लिया गया खरीदने पर फैसला?

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राफेल विमान सौदे पर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के सनसनीखेज दावे के बाद भारत में सियासी घमासान जारी है। राफेल सौदे में ‘ऑफसेट साझेदार’ के संदर्भ में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के कथित बयान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विपक्ष लगातार हमला बोल रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि यह ‘स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार का मामला’ है।

Rafale

राफेल सौदे को लेकर मोदी सरकार के फैसले पर उठाए जा रहे सवालों के बीच देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से बिना नोटिस जारी किए इसकी खरीद के फैसले की प्रक्रिया का ब्योरा मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के संबंध में निर्णय लेने की प्रक्रिया का ब्योरा मांगा है।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मांगी गई जानकारी जेट विमानों की कीमत या उपयुक्तता से संबंधित नहीं है। कोर्ट ने ने कहा कि सूचना को सीलबंद कवर में पेश किया जाना चाहिए और यह सुनवाई की अगली तारीख यानी 29 अक्टूबर तक अदालत में पहुंचनी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोेगोई की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इस मामले में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को सरकार को इस सौदे को अंतिम रूप देेने वाली निर्णय प्रकिया का पूरा ब्योरा एक सीलबंद कवर में देने को कहा है। खंडपीठ ने कहा कि वह इस समय केन्द्र सरकार को कोई नोटिस जारी नहीं कर रही है।

इस याचिका में फ्रांस की कंपनी दसाल्ट द्वारा रिलायंस को दिए गए ठेके की जानकारी भी मांगी गई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अब 29 अक्टूबर को करेगा। गौरतलब है कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर कांग्रेस भारी अनियमितताओं का आरोप लगा रही है।

शीर्ष अदालत उन दो जनहित याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी जिनमें एक में यह मांग की गई थी कि 36 लड़ाकू राफेल विमानों को फ्रांस से खरीदने के लिए भारत ने जो समझौते किए उसका पूरा ब्योरा दिया जाए। जबकि, दूसरी याचिका में शीर्ष अदालत के पर्यवेक्षण में विशेष जांच दल बनाए जाने की मांग की गई थी।

इस याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस. के. कौल और न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की पीठ ने यह स्पष्ट किया कि फ्रांस के साथ हुए इस सौदे के संबंध में उसे कीमत और सौदे के तकनीकी विवरणों से जुड़ी सूचनाएं नहीं चाहिए। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि वह याचिकाओं में लगाए गए आरोपों को ध्यान में नहीं रख रहा है।

पीठ ने कहा, ‘हम सरकार को कोई नोटिस जारी नहीं कर रहे हैं, हम केवल फैसला लेने की प्रक्रिया की वैधता से संतुष्ट होना चाहते हैं।’ बेंच ने यह भी साफ किया है कि वह राफेल सौदे की तकनीकी जानकारी और कीमत के बारे में सूचना नहीं चाहता है। वहीं, केंद्र सरकार ने राफेल डील पर दायर की गई याचिकाओं को रद्द करने की मांग की है।

केंद्र की याचिकाओं को रद्द करने की मांग

सुनवाई के दौरान केंद्र ने राफेल पर दाखिल जनहित याचिकाओं का विरोध किया और यह कहते हुए उन्हें खारिज करने का अनुरोध किया कि राजनीतिक लाभ लेने के लिए ये दाखिल की गई हैं। न्यायालय ने केन्द्र से कहा कि वह सीलबंद लिफाफे में से 29 अक्टूबर तक सूचनाएं सौंपे। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 31 अक्टूबर की तारीख तय की है।

अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि राफेल सौदा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और ऐसे मुद्दों की न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती है। वहीं, कांग्रेस नेता और आरटीआई कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे के संबंध में दायर अपनी जनहित याचिका वापस ले ली है। पीठ राफेल सौदे को लेकर दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

इन याचिकाओं में केंद्र को ये निर्देश देने की मांग की गई है कि वह राफेल सौदे के ब्योरे और संप्रग और राजग सरकार के कार्यकाल के दौरान सौदे की तुलनात्मक कीमतों का विवरण सीलबंद लिफाफे में शीर्ष अदालत को सौंपे। इससे पहले, मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने वकील विनीत ढांडा की तरफ से दायर याचिका पर 10 अक्टूबर को सुनवाई के लिए राजी हुई थी।

 

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