वाराणसी से नामांकन रद्द होने के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ‘चुनाव आयोग बर्खास्त जवान तेज बहादुर की शिकायत पर गौर करे’

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सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी सीट से पर्चा रद्द किए जाने के खिलाफ सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव की शिकायत पर चुनाव आयोग को गुरुवार तक अपना पक्ष रखने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (8 मई) को निर्वाचन आयोग से कहा कि वह तेज बहादुर यादव का वाराणसी संसदीय सीट पर नामांकन रद्द होने को लेकर शिकायत पर गौर करे। यादव ने वाराणसी संसदीय सीट पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया था।

(PTI File Photo)

पीटीआई के मुताबिक, प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्वाचन आयोग के वकील से कहा कि वह आवश्यक निर्देश प्राप्त करके गुरुवार को उसे अवगत कराएं। तेज बहादुर यादव के वकील प्रशांत भूषण ने शीर्ष अदालत के एक फैसले का हवाला दिया और कहा कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के दौरान भी चुनाव याचिका दायर की जा सकती है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर नामांकन करने वाले तेज बहादुर ने निर्वाचन अधिकारी द्वारा नामांकन पत्र खारिज किए जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यादव ने अपनी याचिका में निर्वाचन आयोग के फैसले को पक्षपातपूर्ण और तर्कहीन बताते हुए इसे निरस्त करने का अनुरोध न्यायालय से किया है।

सीमा सुरक्षा बल में जवानों को मिलने वाले भोजन के बारे में शिकायत संबंधी एक वीडियो पोस्ट करने की घटना के बाद यादव को 2017 में सुरक्षा बल से बर्खास्त कर दिया गया था। वाराणसी संसदीय सीट के लिए समाजवादी पार्टी ने शुरू में शालिनी यादव को अपना प्रत्याशी बनाया था, परंतु बाद में उसने सीमा सुरक्षा बल के बर्खास्त जवान को अपना उम्मीदवार बना लिया था।

क्या है पूरा मामला?

तेज बहादुर ने 24 अप्रैल को निर्दलीय और 29 अप्रैल को सपा के उम्मीदवार के तौर पर नामांकन किया था। उन्होंने बीएसएफ से बर्खास्तगी को लेकर दोनों नामांकनों में अलग-अलग दावे किए थे। इस पर जिला निर्वाचन कार्यालय ने तेज बहादुर को नोटिस जारी करते हुए अनापत्ति प्रमाण-पत्र जमा करने का निर्देश दिया था। जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने तेज बहादुर यादव द्वारा पेश नामांकन पत्र के दो सेटों में ‘कमियां’ पाते हुए उनसे एक दिन बाद अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा था।

तेज बहादुर से कहा गया था कि वह बीएसएफ से इस बात का अनापत्ति प्रमाणपत्र पेश करें जिसमें उनकी बर्खास्तगी के कारण दिये हों। जिला मजिस्ट्रेट सुरेन्द्र सिंह ने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा नौ और धारा 33 का हवाला देते हुए कहा कि यादव का नामांकन इसलिए स्वीकार नहीं किया गया क्योंकि वह निर्धारित समय में आवश्यक दस्तावेजों को प्रस्तुत नहीं कर सके। (इंपुट: भाषा/यूएनआई के साथ)

 

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