मोदी सरकार की ‘विफल’ आर्थिक नीति: डॉलर के मुकाबले रुपये में ऐतिहासिक गिरावट, अपने उच्चतम स्तर पर पहुंची पेट्रोल-डीजल की कीमतें

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अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में लगातार रिकॉर्ड तोड़ गिरावट जारी है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए यही एक बुरी खबर नहीं है बल्कि रुपए की विनिमय दर में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में तेज उछाल के बीच देश में पेट्रोल तथा डीजल की कीमतें भी अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। इस साल देश के कई बीजेपी शासित राज्यों और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार कोई कड़ा कदम नहीं उठाती है कि बीजेपी के लिए यह दोनों मुद्दा मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं।

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फाइल फोटो

देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी है। मंगलवार (4 सितंबर) को देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर आग लग गई है। राजधानी दिल्ली में जहां एक लीटर पेट्रोल का दाम 80 रुपये के करीब पहुंच गया है, वहीं आर्थिक राजधानी मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों में पेट्रोल के दाम 80 रुपये प्रति लीटर से भी ऊपर पहुंच चुका है। दिल्ली में डीजल का दाम जहां 71 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा पहुंच चुका है, वहीं मुंबई और चेन्नई में यह 75 रुपये प्रति लीटर से ऊपर पहुंच चुका है।

मंगलवार को राजधानी नई दिल्ली में पेट्रोल के दाम में 16 पैसे और डीजल के दाम में 19 पैसे की बढ़ोतरी हुई। जिसके बाद अब दिल्ली में पेट्रोल 79.31 प्रति लीटर और डीजल 71.34 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। वहीं मुंबई में तो पेट्रोल 86.72 रुपये प्रति लीटर है, जो किसी भी मेट्रो शहर में अब तक का सबसे ज्यादा रेट है। कोलकाता और चेन्नई में क्रमशः 82.22 और 82.41 रुपये प्रति लीटर है। बता दें कि 16 अगस्त से अब तक पेट्रोल की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा का इजाफा हो चुका है, वहीं डीजल के दाम में 2.42 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है।

वहीं, दूसरी तरफ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में लगातार रिकॉर्ड तोड़ गिरावट जारी है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की जा रही है। पिछले एक महीने में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में 2.5 रुपये की गिरावट आई है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 71 से भी नीचे चली गई है जो सर्वकालिक निम्न स्तर पर है। इसका सीधा असर तेल के आयात पर पड़ रहा है और तेल कंपनियों को ज्यादा मुद्रा खर्च करना पड़ रहा है। दरअसल, रुपये में गिरावट की वजह से तेल कंपनियों को कच्चे तेल के लिए डॉलर में भुगतान करने के लिए और अधिक रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।

मोदी सरकार की विफल आर्थिक नीति

कांग्रेस ने डॉलर के मुकाबले रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की ‘‘विफल’’ आर्थिक नीतियों को जिम्मेदार बताते हुए पिछले दिनों कहा था कि मौजूदा सरकार में देश की अर्थव्यवस्था डूब रही है। डॉलर के मुकाबले रुपया टूटकर 71 रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा था कि नाकाम ‘‘मोदीनॉमिक्स’’ से अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगा है।

उन्होंने कहा, ‘‘सचाई यह है कि मोदी सरकार ने व्यवस्थित तरीके से हमारी अर्थव्यवस्था को कमजोर किया। उन्होंने कहा कि ‘‘नोटबंदी की आपदा’, त्रुटिपूर्ण ‘वस्तु एवं सेवाकर’ लागू करना, बैंक क्षेत्र को कमजोर करना और ‘कर आतंकवाद’ ही इसके लिए पूरी तहर जिम्मेदार हैं। उन्होंने इन्हें जानबूझ कर की गयी दुर्घटना की संज्ञा दी।’’

सुरजेवाला ने कहा, ‘‘रुपया आईसीयू में है। मोदी सरकार अंतिम सांस ले रही है। 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए सभी बड़े वादे बीजेपी की कथनी से नदारद हैं।’’ उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘कांग्रेस जो 60 साल में हासिल नहीं कर सकी वो मोदी तथा उनकी त्रुटिपूर्ण आर्थिक नीतियों ने महज 60 महीनों में हासिल कर लिया। रुपये के मूल्य में गिरावट के लिए खराब घरेलू नीतियां ही जिम्मेदार हैं।’’

 

 

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