सेब के बागानों से आईएएस तक की मंज़िल

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यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा में दूसरा मुकाम हासिल करने वाले अतहर आमिर उल शफी खान के दादा का जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में सेब का बागान है।

IAS shafi
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अतहर आमिर के मुताबिक उन्हें आईएएस बनने की प्रेरणा अपने दादा गुलाम अहमद खां से मिली। वह अनपढ़ जरूर थे, लेकिन उनकी इच्छा थी कि वह अपने पोते को अधिकारी बनाएं। इसके लिए वह नियमित रूप से अपने पोते के इकबाल मेमोरियल स्कूल जाते थे और उसकी रिपोर्ट कार्ड के बारे में टीचर्स से बात भी करते थे। आमिर के पिता शफी खान गवर्नमेंट गर्ल्स हॉयर सेकेंडरी स्कूल में इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर हैं और मां ताहिरा बेगम घर संभालती हैं।

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दैनिक भास्कर के मुताबिक आमिर ने बताया कि इससे पहले वह 2014 में यूपीएससी परीक्षा में भी सिलेक्ट हुए थे। उनकी रैंक 560 होने की वजह से उन्हें आईआरटीएस कैडर मिला। वह मौजूदा समय में आईआरटीएस के लखनऊ स्थित ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से रेलवे अधिकारी की ट्रेनिंग कर रहे हैं। आमिर दिसंबर में यहां ट्रेनिंग करने आए थे और यहीं उन्होंने अपने साथियों के साथ इंटरव्यू की तैयारी की। वह यहां खुद ही आपस में मॉक इंटरव्यू करते थे और एक दूसरे की तैयारी को जांचते थे।

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आमिर के मुताबिक उन्होंने स्टेट की प्रियॉरिटीज में उत्तर प्रदेश को जगह दी है। अगर यूपी सरकार उन्हें अपने यहां सेवा करने का मौका देती है तो वह यहां काम करना चाहेंगे। आमिर ने बताया कि जम्‍मू-कश्‍मीर में बेसिक एजुकेशन के बाद उन्होंने आईआईटी मंडी, हिमाचल प्रदेश से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में पढ़ाई की। पढ़ाई के अलावा आमिर को ट्रैकिंग, बैडमिंटन, फुटबाल और क्रिकेट का भी शौक है।

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