कोयला घोटाला मामले में नवीन जिंदल सहित 5 के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश, जिंदल ग्रुप ने बयान जारी कर आरोपों को नकारा

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दिल्ली की एक विशेष अदालत ने कोयला खंड आवंटन घोटाला मामले में सोमवार (1 जुलाई) को कांग्रेस नेता व उद्योगपति नवीन जिंदल और चार अन्य के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया। विशेष न्यायाधीश भरत पराशर ने जिंदल एवं अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420 (धोखाधड़ी) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया।

File Photo: Business Standard

 

जिंदल के अलावा जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के पूर्व निदेशक सुशील मारू, पूर्व उपप्रबंध निदेशक आनंद गोयल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी विक्रांत गुजराल और कंपनी की ओर से हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत अधिकारी डी एन अबरोल के खिलाफ आरोप तय किया जाना है।

अदालत मध्य प्रदेश में अर्टन नॉर्थ कोयला खंड के आवंटन से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रही थी। अदालत ने मामले में आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिये 25 जुलाई की तारीख तय की है। कोर्ट के इस आदेश के बाद जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) की तरफ से एक बयान जारी किया गया है।

अदालत द्वारा आरोप तय करने पर करने के आदेश पर जेएसपीएल ने बयान जारी कर आरोपों से इनकार किया गया है। एक विस्तृत बयान जारी कर कहा गया है कि कंपनी ने कोई गलत काम नहीं किया है और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सच सामने आ जाएगा।

बता दें कि झारखंड में अमरकोंडा मुर्गादंगल कोयला खंड आवंटन मामले में कथित अनियमितताओं से संबंधित अन्य मामले में पूर्व कोयला राज्य मंत्री दसारी नारायण राव और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के साथ जिंदल को भी आरोपी बनाया गया है।

मामले में सीबीआई के आरोपपत्र के अनुसार आरोपियों ने मध्य प्रदेश कोयला खंड का अधिकार पाने के लिए स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष अपने जनवरी 2007 के आवेदन में गलत तथ्य दिए थे और गलत तरीके से लाभ पाने के लिए कोयला मंत्रालय को धोखे में रखा, जिसकी वजह से इस कोयला खंड के लिये उनके नाम की सिफारिश की गई।

मंत्रालय ने अक्टूबर 2009 में कंपनी को आवंटन पत्र जारी किया था। जांच एजेंसी ने आरोपपत्र में 60 दस्तावेजों को जोड़ने के अलावा अपने मामले को साबित करने के लिए 64 व्यक्तियों के नाम अभियोजन पक्ष के गवाह के तौर पर शामिल किए हैं।

आरोपपत्र में कहा गया है कि प्रतिक्रिया फॉर्म में कंपनी ने दो मायने में गलत दावे किए कि उसने झारखंड के पतरातू परियोजना के लिए पहले ही 964 एकड़ भूमि अधिगृहित कर ली है और उसने ओडिशा में अपने अंगुल परियोजना के लिए 4,340 करोड़ रुपये के उपकरण का ऑर्डर दे दिया है।

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