अयोध्या विवाद मामले में मध्यस्थता के विकल्प तलाशने के लिए श्री श्री रविशंकर ने सुप्रीम कोर्ट का किया समर्थन

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‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के संस्थापक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घोर समर्थक श्री श्री रविशंकर ने बुधवार को अयोध्या विवाद मामले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता मार्ग का पता लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का समर्थन किया।

श्री श्री रविशंकर

‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के संस्थापक ने ट्वीट कर लिखा, “माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा मध्यस्थता को प्राथमिकता देना देश के और इस विषय से संबंधित सभी दलों के हित में है। इस विवाद को मैत्रीपूर्ण रूप से सुलझाने का हमें पूरा प्रयास करना चाहिए।”

उसके बाद उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “हमें अपने अहंकार और मतभेदों को अलग रखकर इस विषय से संबंधित सभी दलों की भावनाओं का सम्मान करते हुए सबको साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए।”

बता दें कि श्री श्री रविशंकर संबंधित हितधारकों के बीच संवाद के माध्यम से विवादास्पद बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि भूमि विवाद मामले को सुलझाने के विचार का समर्थन करते रहे हैं। इतना ही नहीं इस मामले में शांतिपूर्ण समाधान पर पहुंचने के लिए उन्होंने मुस्लिम नेताओं के साथ बैठकें भी की हैं।

बता दें कि पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने बुधवार (6 मार्च) को अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजने के फैसले को सुरक्षित रख लिया। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद को मध्यस्थता के जरिए सुलझाया जा सकता है या नहीं, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को संबंधित पक्षों को सुनने के बाद कहा कि इस पर आदेश बाद में सुनाया जाएगा।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में संविधान पीठ ने पक्षकारों की दलीलें सुनीं। कई हिंदू और मुस्लिम संस्थाएं मामले में पक्षकार हैं। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं।

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