महाराष्ट्र में जहरीले कीटनाशक ने ली 20 किसानों की जान, कई ने खो दी अपनी आंखें

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महाराष्ट्र के विदर्भ में खेतों में कटाई का काम करने वाले 29 वर्षीय राठौड़ ने पिछले सप्ताह फसल पर कीटनाशक का छिड़काव किया था, वह उसके लिए आखिरी बार था जब उसने कपास के खेतों को देखा। दिया था। राठौड़ ने बताया कि जल्द ही मेरी देखने की क्षमता जाने लगी, मैं अब कुछ भी नहीं देख सकता और यह सब अचानक से हो गया।

कीटनाशक

उन्होंने बताया कि इस खतरनाक काम के लिए उन्हें मजदूरी के तौर पर दिनभर में 200 से 250 प्रतिदिन मिलते थे। मेरे तीन बच्चे और पत्नी है। घर में एकमात्र कमाने वाला मैं ही हूं। मेरी दृष्टि चली गई है, अब मुझे समझ नहीं आता कि मैं अपने परिवार को कैसे खिलाऊं। घोर निराशा के बाद उसने आत्महत्या करने की सोची जिसके लिए वह एक दो मंजिला घर से कूद गया लेकिन कूदने पर बच गया और उसका एक पैर टूट गया जिसका अब अस्पताल में इलाज चल रहा है।

दूसरी तरफ 39 वर्षीय ब्राह्मणंद आदिक भी इस जहरीले कीटनाशक की चपेट में आकर अपनी आंखें खो चुका है। ब्राह्मणंद ने बताया कि छिड़काव वाले दिन काम के बाद मेरे सिर में दर्द होना शुरू गया अस्पताल पहुंचने पर मुझे दिखाई देना बंद हो गया। कीटनाशकों के छिड़काव के बाद जहर के असर में आने की ऐसे और भी बहुत सारे उदाहरण है। महाराष्ट्र के 600 से अधिक किसान इसकी चपेट में आए है।

पिछले 3 हफ्तों के दौरान कपास की फसल में जहरीले कीटनाशक का छिड़काव करने के दौरान किसान और कामगार इसके सीधे संपर्क में आ गए। जिसके बाद पहले उनकी तबीयत खराब हुई और बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि ऐसे किसान जिनका खुद खेत नहीं है वो ज्यादातर दूसरे खेत मालिकों के लिए कीटनाशक स्प्रे करने का काम कर रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इसके लिए उन्हें दिन के 200 से 250 रुपये मिलते हैं, जबकि अन्य काम करने पर उन्हें करीब 100 से150 रुपये ही मिल पाते हैं।

फसलों पर कीटनाशकों का छिड़काव करते समय कीटनाशकों के जहरीले प्रभाव की चपेट में आने से अब तक 20 किसानों की मौत हो गई। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने घोर लापरवाही बरती है। राज्य के कृषिमंत्री पांडुरंग फुंडकर ने मंगलवार को यह बात स्वीकार की। उन्होंने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद बताया कि सरकार ने मामले की जांच कराने का फैसला किया है। इसके लिए गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है।

जबकि इस मामले में अपना बचाव करते हुए कृषिमंत्री ने कहा कि कृषि केंद्रों के माध्यम कीटनाशक छिड़काव के बारे में यदि गलत मार्गदर्शन किया गया होगा तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। चीन निर्मित स्प्रे पंप के इस्तेमाल पर रोक लगाने के बारे में शीघ्र ही फैसला लिया जाएगा।

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