स्पाइसजेट पर पैसेंजर को उतारने पर 10 लाख रूपये का जुर्माना

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सुप्रीम कोर्ट ने स्पाइसजेट एयरलाइंस को सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित महिला पेसेंजर जीजी घोष को प्लेन से उतारने के मामले में 10 लाख रुपए हर्जाना देने का फैसला सुनाया है। साथ ही स्पाइसजेट को दो महीनों के हर्जाने की रक़म अदा करने को कहा गया है।
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बीबीसी के मुताबिक कोर्ट के कहा कि जिस तरह से पेसेंजर को प्लेन से उतारा गया, उसमें संवेदनहीनता नजर आती है। जस्टिस एके सिकरी और आरके अग्रवाल की डिविजन बेंच के मुताबिक घोष को प्लेन से उतारकर खराब बर्ताव किया गया। यह रूल्स 1937 और सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स, 2008 की गाइडलाइंस का उल्लंघन है।

गौरतलब है कि 46 साल की जीजी घोष कोलकाता के इंडियन इस्टीच्यूट ऑफ सेरेब्रल पाल्सी में शिक्षिका हैं। वे अक्सर देश के भीतर और विदेश में अकेले हवाई यात्रा करती रहती है। लेकिन साल 2012 में जब वे कोलकाता से गोवा जा रही थीं तब स्पाइसजेट के पायलट ने यह कहते हुए घोष को प्लेन से उतार दिया था कि वे उड़ान भरने में सक्षम नहीं हैं। हालांकि स्पाइसजेट ने 2012 में बयान जारी करते हुए घोष को हुई असुविधा के लिए माफ़ी मांग ली थी। लेकिन इसके बावजूद जीजी घोष ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर कर मुआवजे की मांग की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जीजी घोष कोर्ट के फैसले से खुश हैं और उन्होंने इस फैसले को उन लोगों के लिए ऐतिहासिक बताया जो डिसेबल के राइट्स के लिए लड़ रहे हैं।

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