…जब संसद में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के काम की सराहना में सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने थपथपाई मेज

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गुरुवार को लोकसभा में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता व केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के काम की सराहना की। सिर्फ सोनिया ही नहीं, कांग्रेस के साथ-साथ इसमें दूसरी विरोधी पार्टियां भी शामिल थी।

सोनिया गांधी

दरअसल, लोकसभा में गुरुवार (7 फरवरी) को प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भारतमाला परियोजना, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और चारधाम परियोजना से संबंधित प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे। अपने उत्तर के दौरान गडकरी ने कहा कि मेरी यह विशेषता है कि मैं इसके लिए खुद को भाग्यवान समझता हूं कि हर पार्टी के सांसद कहते हैं कि उनके क्षेत्र में अच्छा काम हुआ है।

जल संसाधन और गंगा संरक्षण मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे नितिन गडकरी ने उत्तराखंड के चार धामों को जोड़ने वाली परियोजना से संबंधित प्रश्न का जवाब देते हुए गंगा का जिक्र भी किया और कहा कि प्रयाग में पहली बार गंगा इतनी निर्मल और अविरल दिखी हैं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष सुमीत्रा महाजन से कहा कि कि आप एक बार जाकर देखिए कि गंगा के लिए कितना काम हुआ है। जिस पर लोकसभा अध्यक्ष सुमीत्रा महाजन ने कहा कि काम हुआ है और हमारा आशीर्वाद आपके साथ हैं।

गडकरी के जवाब पूरा करने के बाद बीजेपी सांसदों ने मेज थपथपाकर उनका समर्थन किया। तभी बीजेपी सांसद गणेश सिंह ने खड़े होकर लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन से कहा कि सदन को केंद्रीय सड़क परिवहन के ‘शानदार’ काम की सराहना करनी चाहिए।

इस दौरान, गडकरी को ध्यान से सुन रहीं सोनिया गांधी भी उनके जवाबों पर सिर हिलाकर मुस्कुराते हुए तारीफ के तौर पर मेज को थपथपाती नजर आईं। सोनिया गांधी को ऐसा करते देखकर मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कांग्रेस के दूसरे सांसद में गडकरी के काम की सराहना के तौर पर मेज थपथपाने लगे।

बता दें कि कुछ समय पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नितिन गडकरी को लेकर एक ट्वीट किया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि बीजेपी ने सिर्फ नितिन गडकरी ऐसे नेता हैं जिनमें साहस हैं। राहुल गांधी ने नितिन गडकरी से कहा था कि वो चाहते हैं कि तीन और मुद्दों पर बोलने का साहस दिखाएं।

राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में वो तीन मुद्दे भी बताए थे जिसमें राफेल डील, किसानों की समस्या और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किए जाने के मुद्दे पर बोलने का साहस दिखाने का आग्रह किया था।

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