हिमाचल प्रदेश में इमारत ढहने से 13 सैनिकों समेत 14 की मौत, हादसे की जांच के आदेश

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हिमाचल प्रदेश के कुमारहट्टी नगर में बारिश के कारण एक चार मंजिला ‘असुरक्षित’ इमारत ढह गई जिसमें दबकर 13 सैनिकों और एक नागरिक की मौत हो गई। हादसे में 28 लोगों को बचा लिया गया। बता दें कि भारी बारिश के कारण यहां एक चार मंजिला इमारत ढह गई थी और पास में ढाबे के पास खाना खा रहे जवान इसकी चपेट में आ गए थे। मृतकों में इमारत के मालिक की पत्नी अर्चना भी शामिल है।

(IANS photo)

उपायुक्त के.सी. चमन ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा कि मलबे में 30 सैनिक और 12 नागरिक फंसे हुए थे। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), सेना और राज्य पुलिस ने 22 घंटों तक राहत और बचाव अभियान चलाया।जिन 28 लोगों को बचाया गया उनमें 17 सैनिक और 11 नागरिक हैं। मृतकों में इमारत के मालिक की पत्नी भी शामिल है।

इमारत में असम रायफल्स के जवान रविवार को पार्टी कर रहे थे जब यह इमारत गिरी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कैबिनेट मंत्री राजीव सैजल, सांसद सुरेश कश्यप और विधानसभा अध्यक्ष राजीव बिंदल के साथ घटनास्थल पर पहुंचकर बचाव अभियान का जायजा लिया। यहां उन्होंने बचाए गए लोगों से मुलाकात की।

ठाकुर ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार, इमारत को मानकों के अनुसार नहीं बनाया गया था। उन्होंने इमारत के मालिक शैल कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया। शैल घटना के समय इमारत में नहीं था।

अधिकारियों के अनुसार, निकटवर्ती डगशाई छावनी के असम रायफल्स के सैनिक सड़क किनारे स्थित भोजनालय-आवासीय परिसर में रविवार शाम चार बजे पार्टी कर रहे थे, जब भारी बारिश के कारण इमारत अचानक ढह गई। शिमला से लगभग 55 किलोमीटर दूर कुमारहट्टी-नाहन मार्ग पर यह हादसा हुआ। उपायुक्त ने कहा कि सबसे पहले पहली मंजिल गिरी, इसके बाद पूरी इमारत ढह गई।

राहत और बचाव अभियान में एनडीआरएफ की तीन कंपनियां शामिल रहीं। एनडीआरएफ टीम को शिमला जिले में सुन्नी से एयरलिफ्ट करने के लिए राज्य ने मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर को तैनात किया गया। स्थानीय लोगों ने इमारत ढहने के लिए अवैज्ञानिक ढंग से इमारत के निर्माण और मंजूरी देने में नियमों के उल्लंघन को जिम्मेदार ठहराया है।

अचानक आया भूकंप

एक घायल सैनिक ने संवाददाताओं को बताया कि घटना के समय सेना के कई कर्मियों समेत रेस्त्रां के कर्मी और अन्य ग्राहकों समेत करीब 50 लोग मौजूद थे। उन्होंने कहा कि हमने सोचा कि भूकंप आया है और हमें नहीं याद कि यह इमारत कैसे गिर गई और हम मलबे के अंदर दब गए। मैं करीब 10-15 मिनट तक फंसा रहा जिसके बाद कुछ लोगों ने मुझे बचाया।

आपदा प्रबंधन के निदेशक सह विशेष राजस्व सचिव डी सी राणा ने पीटीआई को बताया कि शुरुआत में भारतीय सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और पुलिस ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान की शुरुआत की। इसके बाद राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की दो टीम रविवार रात में घटनास्थल पर पहुंचकर बचाव अभियान में जुट गई। ये दो टीमें हरियाणा के पंचकूला और शिमला के सुन्नी से थीं। वहीं तीसरी टीम भी पंचकूला से पहुंची और सोमवार सुबह बचाव अभियान शुरू किया।

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