“अगर नाथूराम गोड़से देशभक्त थे, तो क्या महात्मा गांधी देशद्रोही थे?”, सोशल मीडिया पर BJP को शर्मिंदगी का करना पड़ रहा है सामना

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मालेगांव बम विस्फोट मामले में लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का सामना कर चुकीं इस मामले में अभियुक्त और मध्य प्रदेश की भोपाल संसदीय सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी की गोली मार कर हत्‍या करने वाले नाथूराम गोडसे को ‘देशभक्त’ बताकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया। भाजपा उम्मीदवार ने कहा कि नाथूराम गोडसे देशभक्‍त थे, देशभक्‍त हैं और रहेंगे।

साध्वी प्रज्ञा का यह बयान मक्कल नीधि मैयम (एमएनएम) के संस्थापक और मशहूर अभिनेता कमल हासन के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि आजाद भारत का पहला ‘‘उग्रवादी हिंदू’’ था। वह महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे के संदर्भ में बात कर रहे थे। बीजेपी प्रत्‍याशी से कमल हासन के बयान पर प्रतिक्रिया मांगी गई थी।

पत्रकारों ने जब उनसे सवाल किया कि कमल हासन ने नाथूराम गोडसे को हिंदू आंतकवादी बताया था, इस बारे में वह क्या कहना चाहती हैं? इसके जवाब में प्रज्ञा ठाकुर ने कहा, ‘नाथूराम गोडसे देशभक्त थे। देशभक्त हैं और देशभक्त रहेंगे। उन्हें हिंदू आतंकवादी बताने वाले लोग स्वयं के गिरेबान में झांककर देखें। अबकी बार चुनाव में ऐसे लोगों को जवाब दे दिया जाएगा।’

बीजेपी की सफाई

प्रज्ञा के बयान के बाद आलोचनाओं में घिरी भारतीय जनता पार्टी इस मामले पर सफाई दी है। बीजेपी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर द्वारा दिए गए, ‘नाथूराम गोडसे देशभक्त थे, हैं और रहेंगे’ वाले बयान से बीजेपी सहमत नहीं है और इसकी निंदा करती है। पार्टी उनसे इस मामले में सफाई मांगेगी और उनसे सार्वजनिक तौर पर इस कथन के लिए माफी मांगने के लिए कहेगी।

वहीं, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर भाजपा पर निशाना साधा है। सुरजेवाला ने प्रज्ञा के बयान को शेयर करते हुए ट्वीट किया, “अब साफ है, भाजपाई हैं गोडसे के वंशज! भाजपाई बताते हैं गोडसे को देशभक्त और शहीद हेमंत करकरे को देशद्रोही! हिंसा की संस्कृति और शहीदों का अपमान ही है भाजपाई डीएनए!”

एक अन्य ट्वीट में भाजपा नेता के विवादित बयान पर ट्वीट कर लिखा है, “मोदी-अमित शाह जी की चहेती भाजपा नेत्री, प्रज्ञा ठाकुर ने एक बार फिर गांधी जी के हत्यारे, नाथूराम गोडसे को ‘सच्चा देशभक्त’ बता पूरे देश का अपमान किया है।यह भारत के गांधीवादी मूल सिद्धांतों का तिरस्कार करने का घिनौना भाजपाई षडयंत्र है।”

सोशल मीडिया पर बीजेपी की किरकिरी

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी की हत्‍या करने वाले नाथूराम गोडसे को ‘देशभक्त’ बताए जाने के बाद सोशल मीडिया पर भाजपा को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। ट्विटर पर तमाम बड़े पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक पार्टियों ने भाजपा की आलोचना की है। पत्रकार पंकज परासर ने लिखा है, “अगर नाथूराम गोड़से देशभक्त थे तो क्या महात्मा गांधी देशद्रोही थे? अब तो हद ही पार हो गई।”

वहीं, एंकर समीर अब्बास ने लिखा, “क्या पता संसद पहुँचकर ये भी गांधी दर्शन पर लेक्चर देने लग जाएँ..फ़िलहाल तो महात्मा का हत्यारा इनके लिए देशभक्त है… बापू ! आज हम सब फिर शर्मिंदा हैं।” एक अन्य पत्रकार नरेंद्र नाथ मिश्रा ने लिखा, “मोदीजी,अमित शाह जी तत्काल प्रज्ञा ठाकुर को पार्टी से निकाल दें भले एक सीट का नुकसान हो। ऐसा करने से वह साख बचा सकते हैं और प्रज्ञा के नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहने वाले भयावह बयान से अलग कर बड़ी मिसाल दे सकते हैं। नोट-मोदीजी के अगुवाई में गांधी के 150 वीं जयंती साल मनाई जा रही है।”

देखें, लोगों की प्रतिक्रियाएं:

बता दें कि रविवार की रात एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए हासन ने कहा था कि वह एक ऐसे स्वाभिमानी भारतीय हैं जो समानता वाला भारत चाहते हैं और जहां तिरंगे के ‘‘तीन रंग’’ बरकरार रहें। विभिन्न धर्मों के संदर्भ में उन्होंने तिरंगे के तीन रंगों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं ऐसा इसलिए नहीं बोल रहा हूं कि यह मुस्लिम बहुल इलाका है, बल्कि मैं यह बात गांधी की प्रतिमा के सामने बोल रहा हूं। आजाद भारत का पहला उग्रवादी हिंदू था और उसका नाम नाथूराम गोडसे है। वहीं से इसकी (उग्रवाद) शुरुआत हुई।’’

साध्वी प्रज्ञा ने हेमंत करकरे पर दिया था विवादित बयान

ज्ञात हो कि, बीजेपी ने प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल से उम्मीदवार बनाया है। बीजेपी में शामिल होने के बाद से ही प्रज्ञा अपने बयानों की वजह से पार्टी को मुश्किल में खड़ा कर रही हैं। प्रज्ञा ने इससे पहले मुंबई के एटीएस प्रमुख रहे और 26/11 के मुंबई आतंकी हमले में आतंकवादियों की गोली से शहीद हुए हेमंत करकरे पर विवादित बयान दिया था। मामले के तूल पकड़ने पर उन्होंने बयान वापस लेते हुए माफी भी मांग ली थी।

प्रज्ञा ने मुंबई हमलों के दौरान शहीद हुए हेमंत करकरे के खिलाफ विवादित बयान देते हुए कहा था कि मालेगांव बम धमाके के मामले में गिरफ्तारी के बाद करकरे ने उन्हें यातनाएं दी थीं और उनके शाप की ही वजह से आतंकवादियों ने उन्हें मार डाला। 29 सितंबर, 2008 को मालेगांव में हुए बम धमाकों के मामले में प्रज्ञा आरोपी हैं और तकरीबन 9 साल जेल में रही हैं। इस बहुचर्चित मामले में वह इन दिनों जमानत पर चल रही हैं।

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