स्मृति ईरानी ने श्रीनगर से लेह 15 मिनट में पहुंचाने का किया फर्जी दावा, लोगों ने किया ट्रोल

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केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी एक अंग्रेजी न्यूज़ अख़बार की ख़बर का स्क्रीन शॉट शेयर कर सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गई हैं।

Smriti Irani
फाइल फोटो- केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी

दरअसल, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक खबर का स्क्रीन शॉट शेयर किया है, जिसमें दावा किया गया है कि केंद्र सरकार ने ‘जोजिला पास टनल’ के निर्माण की मंजूरी दे दी है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि, इस टनल के निर्माण के बाद श्रीनगर से लेह की दूरी अब महज 15 मिनट में पूरी की जा सकेगी।

लेकिन, जिस परियोजना को मोदी कैबिनेट ने मंजूरी दी है उसे पूर्व की मनमोहन सरकार ने साल 2013 में ही मंजूरी दे चुकी है। बता दें कि, स्मृति ईरानी ने जिस ख़बर का स्क्रीन शॉट शेयर किया है उस ख़बर को ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के हवाले से दिया है।

न्यूज का स्क्रीन शॉट शेयर कर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने लिखा कि, ‘श्रीनगर से लेह 15 मिनट में। कैबिनेट ने जोजिला पास टनल को दी मंजूरी।’

स्मृति ईरानी के ख़बर शेयर करते ही वह सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गई और यूजर्स उसे ट्रोल करने लगे। वहीं, कई यूजर्स ने उन्हें इस जानकारी को सही कर लिखने की सलाह तक दे डाली।

एक यूजर्स ने लिखा कि, श्रीमती जी टनल निर्माण से श्रीनगर से लद्दाख की दूरी 15 मिनट में पूरी नहीं होगी बल्कि टनल की दूरी 15 मिनट में पूरी होगी। प्लीज ट्वीट करने से पहले फेक्ट जांच लें। क्योंकि आप सम्मानित केंद्रीय मंत्री हैं।

देखिए कुछ ऐसे ही ट्वीट्स

https://twitter.com/KPadmaRani1/status/949301239610667008?ref_src=twsrc%5Etfw&ref_url=http%3A%2F%2Fwww.jantakareporter.com%2Findia%2Fsmriti-irani-trolled-false-srinagar-leh-15-minutes-claims-zojilla-pass-tunnel%2F167728%2F

ऐसा प्रतीत होता है कि टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा इस्तेमाल की गई पीटीआई की स्टोरी ने गलत तथ्यों को उठाया था। और शायद TOI एक स्पष्टीकरण जारी करने के लिए जल्दी था।

हालांकि, सवाल यह उठता है कि स्मृति ईरानी ने गलत तथ्यों का पालन कैसे किया। जबकी वे खुद उस मंत्रिमंडल का हिस्सा थे, जो ‘जोजिला पास टनल’ परियोजना को मंजूरी देते थे।

बता दें कि, लेह और श्रीनगर के बीच की दूरी 800 किलोमीटर से अधिक है और और इसे तय करने में सड़क के द्वारा 21 घंटे से अधिक का समय लगता है।

वहीं, श्रीनगर और लेह के बीच एक सीधी उड़ान है और यहां तक कि विमान के द्वारा भी इस यात्रा को तय करने में करीब 55 मिनट तक का समय लगता है।

स्मृति ईरानी के दावे में एक और तथ्यपूर्ण गलती थी। यह मनमोहन सरकार की कैबिनेट थी, जो पहले से ही ‘जोजिला पास टनल’ परियोजना को मंजूरी दे चुकी थी। इस ख़बर को 18 अक्टूबर 2013 को Pioneer newspaper ने दिखाई थी।

पिछले साल राहुल गांधी ने Z-Morh Tunnel (6.5 किलोमीटर) के लिए नींव रखी थी, जो उम्मीद है कि श्रीनगर-कारगिल-लेह और लद्दाख के बीच हर मौसम में संपर्क सुविधा उपलब्ध कराएगी जो जाड़े में भारी हिमपात के कारण दुनिया के शेष हिस्सों से कटा रहता है। दोनों परियोजनाओं को पूरा करने में 10 साल का समय लग सकता हैं और करीब 20,000 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं।

पीटीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि, शुक्रवार की कैबिनेट ने इस परियोजना को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने जम्मू कश्मीर में 14.2 किमी. लंबी सुरंग परियोजना को मंजूरी दी।

दोनों रिपोर्टिंग से यह स्पष्ट होता है कि शुक्रवार को मोदी सरकार ने जो मंजूरी दी है, उस मंजूरी को चार साल पहले ही मनमोहन सिंह की सरकार दे चुकी है।

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