दिल्ली हिंसा: SIT ने शुरू की जांच, मीडिया और चश्मदीदों से की 7 दिन में सबूत देने की अपील

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उत्तर पूर्वी दिल्ली में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) को लेकर भड़की साम्प्रदायिक हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 38 पर पहुंच गई है। बीते दिनों उत्तर पूर्वी दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर भड़की साम्प्रदायिक हिंसा की जांच एसआईटी ने गुरुवार रात से ही शुरू कर दी। एसआईटी का गठन गुरुवार को दोपहर बाद किया गया था।

Photo: IANS

गुरुवार को एसआईटी गठित होने के तत्काल बाद दिल्ली पुलिस अपराध शाखा के एडिशनल पुलिस कमिश्नर ने सबसे पहले एक अपील जारी की। आम-नागिरक और मीडिया के नाम जारी अपील में कहा गया है कि इस हिंसा की जांच में जिसके पास जो भी तस्वीरें, वीडियो फुटेज या फिर अन्य संबंधित सबूत हों, तो वो सात दिन के भीतर पुलिस को मुहैया कराके जांच में मदद करें। तस्वीरें और वीडियो फुटेज उत्तर पूर्वी दिल्ली जिले के डीसीपी के सीलमपुर स्थित कार्यालय में जमा कराने होंगे।

अपील में अनुरोध किया गया है कि 23 फरवरी 2020 को या फिर उसके बाद उत्तर पूर्वी दिल्ली जिले में जो भी हिंसात्मक घटनाएं हुई हैं, उनसे संबंधित सबूत पुलिस तक पहुंचाने में विशेषकर मीडिया भी मदद करे। सबूत पुलिस के हवाले करने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी। अगर कोई इन हिंसक घटनाओं के बारे में गवाही देना चाहता हो तो उसे भी पुलिस गुप्त रखेगी।

चांद बाग में दिल्ली पुलिस के ज्वांइट कमीश्नर ओपी मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि, “इलाके में हालात सामान्य होने की प्रक्रिया कल से शुरू हो गई थी। हमारा फोकस यहां रहने वाले लोगों का सामान्य जन जीवन शुरू हो सुनिश्चित करना है। फ्लैग मार्च, पेट्रोलिंग के जरिए हम लोगों को विश्वास में लेने की कोशिश कर रहे हैं।”

बता दें कि, संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) को लेकर दिल्ली में हुई हिंसा में अब तक 38 लोगों की मौत हो गई है। कई इलाकों में भड़की हिंसा में अब तक 56 पुलिसकर्मियों समेत करीब 200 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। इस हिंसा में हेड कांस्टेबल रतनलाल और इंटेलिजेंस ब्यूरो के अफसर अंकित शर्मा की भी मौत हो गई। (इंपुट: आईएएनएस के साथ)

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