संवैधानिक प्रावधानों को नज़रअंदाज कर राज्यपाल ने राष्ट्रपति की बजाय जेटली से किया गोवा में सरकार बनाने के लिए परार्मश, ट्वीटर पर हुई कड़ी निंदा

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एक सनसनीखेज रहस्योद्घाटन में खुलासा हुआ कि गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने गोवा में राज्य में सरकार बनाने के लिए भाजपा को आमंत्रित करने से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को बुलाया।

‘मुंबई मिरर’ से बात करते हुए सिन्हा ने कहा, ‘मुझे लगा कि मुझे अरुण जेटली से बात करनी चाहिए और मैंने उन्हें शाम 9.30 के आसपास बुलाया। परिस्थितियों पर चर्चा के लिए।’ आगे उन्होंने बताया कि मैंने उन्हें बताया कि बहुमत के लिए संख्याएं सत्यापन की आवश्यकता है जबकि कांग्रेस के नेता अभी तक नहीं आए हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी पार्टी संख्या के साथ आती है, तो उसे स्वीकार किया जाना चाहिए।

कांग्रेस ने भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पूर्व सदस्य सिन्हा की इस परामर्श के बाद कड़ी आलोचना की और उन्हें अपनी पार्टी जो विधानसभा चुनावों के बाद सबसे बड़ी इकाई के रूप में उभर कर सामने आए थी पहले सरकार बनाने के लिए आमंत्रित न करने का आरोप लगाया।

कांग्रेस द्वारा इस पर शिकायत करने के कुछ दिन बाद जेटली ने कहा था उनकी स्वीकार्यता बहुत कम देखने को मिलती है। एक ब्लाॅग में जेटली ने लिखा था कि कांग्रेस पार्टी थोड़ी बहुत शिकायत करती है। इन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर गोवा में जनादेश श्चोरीश् करने का आरोप लगाया था जो सुप्रीम कोर्ट के सामने असफल रहा। इन्होंने लोकसभा में भी मुद्दों को उठाने का प्रयास किया। इस सबके पीछे तथ्य क्या है?

राज्यपाल को इसके बाद सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रह है। दिल्ली में चल रहे संसदीय सत्र में कांगे्रस ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इस बात को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई है।

https://twitter.com/Shehzad_Ind/status/842603969163681792

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