गायक सोनू निगम बोले- देश में बढ़ रहे रोष से चिंतित हूं, हमें मुस्कुराने और संयम रखने की जरूरत है

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बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के बाद अब गायक सोनू निगम ने देश में हालात को लेकर बड़ा बयान दिया है। गायक सोनू निगम का कहना है कि वह देश में बढ़ रहे रोष से चिंतित हैं और चाहते हैं कि लोग मुस्कुराएं तथा धैर्य रखें। बता दें कि सोनू निगम पाकिस्तानी संगीतकारों और ‘मी टू’ जैसे अभियानों पर अपनी टिप्पणियों को लेकर पिछले दिनों चर्चा में रहे है।

सोनू निगमसोनू निगम ने एक मीडिया सम्मेलन में अनु मलिक का समर्थन किया था। निगम ने कहा था, ‘‘जो सम्माननीय महिला ट्विटर पर ऊटपटांग बातें कर रही हैं, वह एक ऐसे व्यक्ति की पत्नी हैं जिन्हें मैं बेहद करीब मानता हूं। हालांकि वह इस संबंध को भूल चुकी हैं। मैं शिष्टाचार बनाए रखना चाहूंगा।’ इस पर गायिका सोना महापात्रा ने मलिक को ‘लगातार उत्पीड़न’ करने वाला व्यक्ति बताया था।

इस पर सफाई देते हुए सोनू निगम ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘मैं देश के आक्रोश को लेकर काफी चिंतित हूं। शिष्टाचार की आवश्यकता है। जिस तरह की भाषा का उपयोग लोग करते हैं वह आश्चर्यजनक है। जैसी भाषा का इस्तेमाल उन्होंने (सोना) किया उसमें बहुत द्वेष था। मैंने अपने हर बयान में मर्यादा बनाए रखी। हमें मुस्कुराने और संयम रखने की जरूरत है।’ बता दें कि इससे पहले सोनू सनसनीखेज हेडलाइन के कारण लोगों के निशाने पर आ गए थे।

इस बारे में सोनू ने कहा, ‘जब मुझे कुछ कहना होगा तो मैं वह कहूंगा जिस पर मुझे विश्वास है। मैं सच कहूंगा। आंख के बदले आंख … यह मेरा चीजों से निपटने का तरीका नहीं है। इससे केवल मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा पीट पीटकर हत्या), रोड रेज (सड़क पर चालकों द्वारा हिंसक रोष व्यक्त करना) जैसी घटनाएं ही होती हैं।’

गौरतलब है कि सोनू ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि वह पाकिस्तान से होते तो उन्हें भारत में काम करने के अधिक अवसर मिलते। हालांकि बाद में इस बयान पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा था कि यह बयान उन्होंने संगीत जगत में मौजूदा रॉयल्टी के संदर्भ में दिया था।

आपको बता दें कि 17 अप्रैल 2017 को सोनू निगम ने मस्जिदों से होने वाली अजान पर सवाल उठाते हुए उसे गुंडागर्दी तक करार दे दिया था। सोनू ने अपने ट्वीट्स में लिखा था कि, ”ईश्‍वर सबका भला करे। मैं मुस्लिम नहीं हूं और मुझे सुबह अज़ान के चलते उठना पड़ता है। भारत में यह जबरन धार्मिकता कब खत्‍म होगी? इसके अलावा उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा था, ‘बता दूं कि जब मोहम्‍मद ने इस्‍लाम बनाया तब बिजली नहीं थी। एडिसन के बाद भी मुझे यह शोर क्‍यों सुनना पड़ता है?’

उन्होंने अपने अगले ट्वीट में मंदिर और गुरुद्वारे का जिक्र करते हुए कहा, ‘मैं किसी मंदिर या गुरुद्वारे द्वारा उन लोगों को जगाने के लिए बिजली के उपयोग को जायज नहीं मानता जो धर्म पर नहीं चलते। फिर क्‍यों? ईमानदारी? सच्‍चाई? गुंडागर्दी है बस?’ गौरतलब है कि मस्जिद में लोगों को बुलाने के लिए अजान दी जाती है। अजान का अर्थ होता है पुकारना या घोषणा करना, अजान दिन में पांच बार नमाज से पहले होती है।

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