बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर की छठी रिपोर्ट भी आई निगेटिव, अस्पताल से मिली छुट्टी

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बालीवुड की मशहूर सिंगर कनिका कपूर को आखिरकार लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGIMS) से छुट्टी दे दी गई है क्योंकि उनकी कोरोनो वायरस परीक्षण की दूसरी रिपोर्ट भी निगेटिव आई थी। फिलहाल, कनिका कपूर 14 दिन तक घर में क्वारंटीन रहेंगी। बता दें कि, कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद 20 मार्च से वो अस्पताल में भर्ती थी।

कनिका कपूर

SGPGIMS की पीआरओ कुसुम यादव ने कहा कि कनिका को घर जाने की अनुमति दे दी गई है। कनिका को यहां 20 मार्च को भर्ती कराया गया था जब उनके कोरोना परीक्षण पॉजिटिव आए थे। उनके लगातार पांच कोरोना परीक्षण पॉजिटिव आए थे। हालांकि, उनकी शनिवार और रविवार की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई थी।

बता दें कि, सिंगर कनिका कपूर देश में इस घातक वायरस से संक्रमित होने वाली पहली बॉलीवुड सेलिब्रिटी हैं। इंस्टाग्राम पर उन्होंने एक बयान में उन्होंने बताया कि कैसे लंदन से लौटने पर उनमें फ्लू के लक्षण विकसित हुए। उन्होंने दावा किया कि जब तक उनका कोरोना परीक्षण पॉजिटिव नहीं आ गया तब तक वो इस संक्रमण से अनजान थीं। हालांकि, कुछ दिनों के बाद उन्होंने इस पोस्ट को हटा दिया था।

9 मार्च को लंदन से आईं गायिका ने कोरोना के लक्षण होने के बाद भी लखनऊ में सैकड़ों लोगों के साथ पार्टियां करने और अन्य कार्यक्रमों में हिस्साा लेने के कारण मीडिया द्वारा जमकर आलोचना की गई थी। जिस पार्टी में कनिका गई थीं वहां पर कुछ नेता, बिजनेसमैन भी आए थे। हालांकि जिनसे भी कनिका का इंट्रैक्शन हुआ है उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई है। हालांकि, जो भी लोग कनिका कपूर के संपर्क में आए उनमें से कोई भी पॉजिटिव नहीं पाया गया।

जब उसके परीक्षणों से पता चला कि वह कोरोना पॉजिटिव है तो उसे 20 मार्च को अस्पाताल में भर्ती कराया गया। अब कनिका की परेशानियां बढ़ने की संभावना है, क्योंकि उसके खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं। उन्होंने कोरोना वायरस संक्रमित होने और अधिकारियों द्वारा खुद को घर में आइसोलेट करने के निर्देश का उल्लंघन कर शहर में विभिन्न सामाजिक समारोहों में हिस्सा लिया था। उनकी इन लापरवाहियों के चलते उन पर एफआईआर दर्ज की गई थीं।

उनके खिलाफ शहर के सरोजनी नगर पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 188, 269 और की 270 के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन पर ये प्राथमिकी लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) द्वारा की गई शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी। (इंपुट: आईएएनएस के साथ)

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