मध्य प्रदेश: उपचुनाव से पहले BJP को झटका, पूर्व विधायक पारुल साहू कांग्रेस में शामिल

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मध्य प्रदेश में होने वाले उपचुनाव की तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ है, लेकिन सभी दल तैयारियों में जुट गई है। राज्य में 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले जोड़तोड़ की राजनीति का दौर भी जारी है। सागर के सुरखी विधानसभा क्षेत्र की भाजपा की पूर्व विधायक पारुल साहू ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली।

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मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ के श्यामला हिल्स स्थित आवास पर आयोजित कार्यक्रम में पारुल साहू ने अपने समर्थकों के साथ शुक्रवार को कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। पारुल ने साल 2013 में सुरखी से भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की थी। पारुल के पिता संतोष साहू कांग्रेस से विधायक रह चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पारुल के कांग्रेस में शामिल होने पर कहा कि यह उनकी घर वापसी है। पारुल के पिता कांग्रेस के बड़े नेता रहे हैं, उनके चाचा कांग्रेस के पदाधिकारी हैं।

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने अपने ट्वीट में लिखा, सुरखी सीट से पूर्व बीजेपी विधायक श्रीमती पारुल साहू जी ने आज प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ जी की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। मध्य प्रदेश बचाने की इस मुहिम में आपका स्वागत है। “जीतेगा मध्यप्रदेश, जीतेगी कांग्रेस”

मालूम हो कि सुरखी से विधायक रहे मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था और यहां से भाजपा के संभावित उम्मीदवार है। वहीं, पारुल साहू उप-चुनाव में सुरखी से कांग्रेस की उम्मीदवार हो सकती हैं।

गौरतलब है कि, 2013 के चुनाव में भाजपा की पारुल साहू ने कांग्रेस के गोविंद सिंह को शिकस्त दी थी। 2018 में उनका पार्टी ने टिकट काट दिया था। वही, सिंधिया समर्थक गोविंद सिंह राजपूत के भाजपा में शामिल होने के बाद से वह नाराज चल रही हैं। अब वह कांग्रेस में शामिल होती हैं और पार्टी पारुल साहू को अपना उम्मीदवार बनाती है। इसके बाद सुरखी में एक बार फिर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और पारुल साहू के बीच उपचुनाव में मुकाबला होगा।

बता दें कि, सिंधिया के साथ 22 विधायकों ने भी कमलनाथ सरकार के खिलाफ बगावत छेड़ दी थी। सभी ने अपनी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर सिंधिया के साथ भाजपा का दामन थाम लिया था। इसके बाद 3 और कांग्रेसी विधायकन अपनी सदस्यता छोड़कर भाजपा के पाले में आ गए थे। 3 सीटें विधायकों के निधन से खाली हुई थीं। इन सभी 28 सीटों पर आगामी अक्टूबर मध्य तक उपचुनाव होने हैं।

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