राफेल सौदा विवाद: पीएम मोदी की चुप्पी पर शिवसेना ने फिर उठाए सवाल

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पिछले काफी दिनों से राफेल विमान की कीमतों को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और विपक्ष के बीच छिड़ा विवाद  थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। इसी बीच, राफेल विमान सौदे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौन रहने पर सवाल उठाते हुये केंद्र में एनडीए की सहयोगी और महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार में साथ देने वाली शिवसेना ने गुरूवार को कहा कि इससे लोगों में यह ‘‘संदेह’’ और गहरा हो गया है कि इसमें कुछ गड़बड़ हुआ है।

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सेना ने व्यंग्य करते हुए कहा कि लोग यह विश्वास करेंगे कि रक्षा मंत्रालय में राफेल घोटाला नहीं हुआ था जैसा कि महाराष्ट्र में कोई सिंचाई घोटाला नहीं हुआ। पार्टी ने दावा किया कि विपक्ष ने संदेह व्यक्त किया है कि राफेल सौदे में कुछ छिपाया जा रहा है और सरकार की मंशा क्या है।

समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट  मुताबिक, सेना के मुखपत्र ‘सामना’ में छपे संपादकीय में सवाल करते हुए कहा, ‘अंत तक प्रधानमंत्री इस मामले में चुप्पी साधे रहे और राफेल सौदे की जानकारियां सीलबंद लिफाफे में रखकर इसे उच्चतम न्यायालय को सौंप दिया गया, यह (सरकार) संदेह को और बढ़ावा दे रही है। कोई यह कैसे जानेगा कि लिफाफे में सच बताया गया है या फिर लिफाफा खाली है।

केंद्र ने सोमवार को राफेल लड़ाकू विमान की कीमत से जुड़ी जानकारी एक सीलबंद लिफाफे में उच्चतम न्यायालय को सौंपी थीं। सरकार के सूत्रों ने बताया कि सरकार ने राफेल सौदे के बारे में लिए गए फैसले से जुड़ी ‘पूरी जानकारी’ सौंप दी है। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दल लगातार ये आरोप लगाते आ रहे हैं कि फ्रांसिसी कंपनी से राफेल लड़ाकू विमान खरीद एक ‘घोटाला’ है। केंद्र ने कहा है कि इस तरह की खरीद में सभी नियमों और विनिमयों का पालन किया गया।

राज्य और केंद्र में सहयोगी इस दल ने दावा किया कि सिंचाई घोटाले के कारण महाराष्ट्र के खजाने को साठ हजार करोड़ रूपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल ने इसके लिए अजित पवार और सुनील तटकरे जैसे एनसीपी नेताओं को इसमें दोषी बताया है। सेना ने कहा कि सत्ता में चार साल रहने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ये नेता आरोपों को कई बार नकार चुके हैं।

गौरतलब है कि, राफेल सौदे को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि एनडीए सरकार हर विमान को करीब 1,670 करोड़ रुपये में खरीद रही है जबकि यूपीए सरकार जब 126 राफेल विमानों की खरीद के लिए बातचीत कर रही थी तो उसने इसे 526 करोड़ रुपये में अंतिम रूप दिया था।

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