मध्य प्रदेश: शिवराज सिंह चौहान ने किया मंत्रियों के विभागों का बंटवारा, जानें किसको मिला कौन सा मंत्रालय

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को अपने मंत्रियों के बीच विभागों का वितरण कर दिया। बता दें कि, 2 महीने से भी ज्यादा लंबे इंतजार के बाद किए गए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से ही विभागों के बंटवारे पर पशोपेश चल रही थी। आखिरकार सोमवार 13 जुलाई को ये इंतजार भी खत्म हुआ और मंत्रियों को उनके विभागों का आवंटन हो गया।

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आधिकारिक सूत्रों के अनुसार चौहान ने जनसंपर्क, सामान्य प्रशासन, नर्मदा घाटी विकास, विमाानन और ऐसे अन्य विभाग, जो किसी अन्य मंत्री को नहीं सौंपे हैं, अपने पास रखे हैं। डॉ नरोत्तम मिश्रा गृह, जेल, संसदीय कार्य और विधि विभाग संभालेंगे। गोपाल भार्गव लोक निर्माण, कुटीर और ग्रामोद्योग विभाग देखेंगे। तुलसीराम सिलावट जल संसाधन, मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विभाग की जिम्मेदारी निभाएंगे।

वन विभाग विजय शाह को सौंपा गया है, जबकि वित्त, वाणिज्यिक कर और योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग जगदीश देवड़ा के हवाले किया गया है। बिसाहूलाल सिंह खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग देखेंगे। यशोधराराजे सिंधिया खेल एवं युवा कल्याण, तकनीकी शिक्षा कौशल विकास एवं रोजगार विभाग संभालेंगी। भूपेंद्र सिंह नगरीय विकास एवं आवास विभाग और मीना सिंह आदिम जाति कल्याण, अनुसूचित जाति कल्याण विभाग का नेतृत्व करेंगे।

किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग कमल पटेल, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एदल सिंह कंसाना, राजस्व एवं परिवहन गोविंद सिंह राजपूत, खनिज साधन और श्रम बृजेंद्र प्रताप सिंह और चिकित्सा शिक्षा एवं भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विश्वास सारंग को आवंटित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल में 2 जुलाई को 28 मंत्रियों को शामिल किया था। मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा के 16 मंत्रियों में 7 पुराने और 9 नए चेहरे शामिल किया था। कांग्रेस के बागी खेमे से कुल 14 मंत्री हो गए हैं। इसी साल मार्च में कुल 22 विधायकों ने इस्तीफा दिया था।

बता दें कि, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कुछ माह पूर्व ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। उनका आरोप था कि मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उन्हें अलग-थलग कर रहे थे। सिंधिया के साथ कांग्रेस के 20 से अधिक विधायकों ने भी भाजपा का दामन थाम लिया था, जिसके चलते मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार गिर गई थी। बाद में सिंधिया के सहयोग से राज्य में भाजपा ने अपनी सरकार बनाई और शिवराज सिंह चौहान फिर से प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। (इंपुट: एजेंसी के साथ)

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