सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिवसेना ने कहा- अरविंद केजरीवाल को काम करने दीजिए

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केंद्र में एनडीए की सहयोगी और महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार में साथ देने वाली शिवसेना ने आज कहा कि केंद्र को दिल्ली में आप सरकार के साथ सहयोग करना चाहिए और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को काम करने की इजाजत देनी चाहिए।

शिवसेना

दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल (एलजी) के बीच शक्तियों के बंटवारे के विषय पर सुप्रीम कोर्टय का फैसला आम आदमी पार्टी के पक्ष में आने के बाद शिवसेना का यह बयान आया है। शिवसेना ने कहा कि एलजी और आप सरकार के बीच तकरार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यदि चाहते तो उप राज्यपाल को नियंत्रित कर सकते थे। शीर्ष न्ययालय ने दो दिन पहले एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि एलजी निर्वाचित सरकार की सलाह पर काम करने के लिए बाध्य हैं और वह बाधक नहीं बन सकते हैं।

समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित एक संपादकीय में लिखा है, ‘…कम से कम अब एलजी और दिल्ली सरकार के बीच गतिरोध खत्म हो जाना चाहिए तथा केजरीवाल को मुख्यमंत्री के तौर पर अपना काम करने देना चाहिए।’ पार्टी ने कहा कि राजनीतिक गतिरोध केजरीवाल और एलजी अनिल बैजल के बीच नहीं था, बल्कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच था।

शिवसेना ने कहा कि यदि मोदी चाहते तो वह केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एलजी को नियंत्रित कर सकते थे। लेकिन यह काम उच्चतम न्यायालय को करना पड़ा। शिवसेना ने कहा कि उसे संदेह है कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद दिल्ली सरकार के फैसलों में एलजी की दखलअंदाजी खत्म हो जाएगी।

संपादकीय में कहा गया है कि मोदी लहर के बावजूद आप सरकार 2015 में प्रचंड जनादेश के साथ सत्ता में आई थी और भाजपा को दिल्ली विधानसभा चुनाव में मात्र तीन सीट मिली थी। इसमें कहा गया है कि केजरीवाल की कार्य शैली पर विचारों का मतभेद हो सकता है लेकिन लोगों के जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए। केंद्र को केजरीवाल सरकार के साथ अवश्य ही सहयोग करना चाहिए।

सामना में कहा गया है कि एलजी ने अपने संवैधानिक पद को ध्यान में नहीं रखा । इसने प्रशासन और राजभवन की प्रतिष्ठा कम की। शिवसेना ने कहा कि यदि केंद्र को लगता है कि केजरीवाल काम नहीं कर रहे या वह भ्रष्ट हैं तो उसे दिल्ली सरकार को बर्खास्त कर देना चाहिए , लेकिन उसे कामकाज नहीं करने देना अनुचित है।

पार्टी ने कहा कि दिल्ली सरकार को क्लर्क या चपरासी तक नियुक्त करने का अधिकार नहीं है, वह नीतिगत फैसले नहीं कर सकती, आईएएस अधिकारियों की बैठक नहीं बुला सकती और उन्हें निर्देश नहीं दे सकती। इसने कहा कि यह एक निर्वाचित सरकार का गला घोंटने जैसा है। इसलिए, केजरीवाल सरकार ने विरोध किया और आप मंत्री राजभवन में धरना पर बैठे। संपादकीय में कहा गया है कि एलजी आवास में धरना पर बैठे आप मंत्रियों की तस्वीर आपातकाल के दौर से भी अधिक बदतर स्थिति को दिखाती है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फैसला दिया कि उपराज्यपाल निर्वाचित सरकार की सलाह मानने को बाध्य है और वह बाधा डालने वाले नहीं हो सकते। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि उपराज्यपाल ‘‘विघ्नकारक’’ के रूप में काम नहीं कर सकते। संविधान पीठ ने तीन अलग-अलग लेकिन सहमति के फैसले में कहा कि उपराज्यपाल के पास स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं है।

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