“तुरंत करें सर्जिकल स्‍ट्राइक”: केंद्रीय मंत्री के ‘किसान आंदोलन में चीन-पाक का हाथ’ वाले बयान पर शिवसेना ने केंद्र पर साधा निशाना

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे ने दावा किया कि तीन नए कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग को लेकर जारी किसानों विरोध प्रदर्शनों के पीछे चीन और पाकिस्तान का हाथ है। उनके इस बयान की लोग जमकर आलोचना कर रहे हैं। अब शिवसेना ने भी केंद्रीय मंत्री के बयान को लेकर अपनी पुरानी सहयोगी भाजपा पर निशाना साधा है। शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि यदि एक मंत्री के पास किसान आंदोलन में चीन और पाकिस्तान की भूमिका होने की जानकारी है तो सरकार को तुरंत पाक और चीन पर सर्जिकल स्ट्राइक करनी चाहिए।

किसान आंदोलन
फाइल फोटो: संजय राउत

समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, संजय राउत ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, “अगर एक केंद्रीय मंत्री के पास इस बात की जानकारी है कि किसान आंदोलन के पीछे चीन और पाकिस्तान है तो, रक्षा मंत्री को तुरंत चीन और पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक करनी चाहिए। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और तीनों सेना प्रमुखों को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।”

वहीं, अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्ला ने केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि, “यह भारतीय किसानों का अपमान है। किसान अपने स्वयं के हितों का नेतृत्व करते हैं।”

केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे ने कहा, ‘जो आंदोलन चल रहा है, वह किसानों का नहीं है। इसके पीछे चीन और पाकिस्तान का हाथ है। इस देश में मुसलमानों को पहले भड़काया गया। (उन्हें) क्या कहा गया? एनआरसी आ रहा है, सीएए आ रहा है और छह माह में मुसलमानों को इस देश को छोड़ना होगा। क्या एक भी मुस्लिम ने देश छोड़ा?” उन्होंने कहा,” वे प्रयास सफल नहीं हुए और अब किसानों को बताया जा रहा है कि उन्हें नुकसान सहना पड़ेगा। यह दूसरे देशों की साजिश है।”

दानवे ने महाराष्ट्र के जालना जिले के बदनापुर तालुका में कोल्टे तकली स्थित एक स्वास्थ्य केंद्र के उद्घाटन के दौरान ये बातें कहीं। हालांकि, मंत्री ने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया कि किस आधार पर उन्होंने यह दावा किया कि किसानों के विरोध के पीछे दोनों पड़ोसी देश हैं। दानवे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों के प्रधानमंत्री हैं और उनका कोई भी निर्णय किसानों के खिलाफ नहीं होगा।

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