शिक्षा मित्रों ने योगी सरकार पर लगाया धोखा देने का आरोप, आज विधानसभा का करेंगे घेराव, जानें क्या है पूरा मामला?

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उत्तर प्रदेश के 1.72 लाख शिक्षामित्रों ने अब अपने भाग्य का फैसला योगी सरकार के पाले में डाल दिया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षा मित्रों का समायोजन रद्द किए जाने के बाद लखनऊ के लक्ष्मण मेला ग्राउंड में लाखों शिक्षकों ने 21-22 अगस्त को सत्याग्रह किया और 23 अगस्त को जेल भरो आंदोलन का कार्यक्रम था, लेकिन शिक्षामित्रों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया था। इस दौरान सीएम योगी ने समान कार्य, समान वेतन की मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया था। जिसके बाद आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन और उप्र प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ ने उम्मीद जताई कि योगी सरकार नियम बनाकर शिक्षामित्रों को पूर्ण अध्यापक का दर्जा दिलाएगी। लेकिन इतने अब इन एसोशिएशनों का योगी सरकार से भरोसा उठता जा रहा है।

विधानसभा का कर सकते हैं घेराव

उप्र प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेष यादव ने ‘जनता का रिपोर्टर’ से बातचीत में योगी सरकार पर धोखा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हमे अखबारों के माध्यम से जानकारी मिली है कि यूपी के प्रमुख सचिव द्वारा आज शाम पांच बजे कैबिनेट में शिक्षा मित्रों को 10 हजार रुपए मानदेय देने का एक प्रस्ताव पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह खबर सुनकर राज्य भर के शिक्षा मित्रों में बेहद नाराजगी है।

यादव ने कहा कि अगर सरकार द्वारा यह प्रस्ताव पेश किया जाता है तो हम विधानसभा का घेराव करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य के सभी जिलों के मुख्यालयों पर हजारों शिक्षा मित्र काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। उन्होेंने कहा कि सभी 75 जिलों में शिक्षा मित्र इकट्ठा हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों को समान कार्य, समान वेतन से नीचे कुछ भी मंजूर नहीं है।

यादव ने कहा कि अगर सरकार द्वारा यह प्रस्ताव पेश किया जाता है तो राज्य के सभी जिलों के मुख्यालयों पर लाखों शिक्षा मित्र एक बार फिर सड़क पर उतर जाएंगे। उन्होंने योगी सरकार पर धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन सरकार में आने के बाद उनका रूख बदल गया है।

अधर में है जीवन

उप्र प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के उपाध्यक्ष राजेश कुमार साहनी ने ‘जनता का रिपोर्ट’ से कहा कि शिक्षा मित्र पिछले 16 वर्षों से लगातार प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण का कार्य कर रहे हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनका जीवन अधर लटक गया है। लिहाजा, मानवीय आधार पर सहायक शिक्षक के तौर पर शिक्षामित्रों के समायोजन को जारी रखा जाए। शिक्षा मित्रों का कहना है कि उनके पास अनुभव के साथ-साथ स्नातक और बीटीसी का डिग्री है।

उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षकों की कमी को ध्यान में रखते हुए स्कीम के तहत उनकी नियुक्ति हुई थी। उनकी नियुक्ति किसी पिछले दरवाजे से नहीं हुई थी। वह पढ़ाना जानते हैं, क्योंकि उनके पास कई सालों का अनुभव है। अब उनके साथ उम्र के इस पड़ाव में मानवीय रवैया अपनाया जाना चाहिए। शिक्षा मित्रों का कहना है कि अधिक उम्र हो जाने की वजह से अब उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है। अब लाखों शिक्षक सरकार से उम्मीद की आस लगाए बैठै हुए हैं।

क्या है शिक्षा मित्र विवाद?

दरअसल, उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षामित्र से सहायक शिक्षक बने 1.72 लाख शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2017 को बड़ा झटका देते हुए शिक्षामित्रों के समायोजन को रद्द कर दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि यदि सरकार चाहे तो इनके टीईटी पास करने के बाद इन्हें लगातार दो भर्तियों में मौका दे सकती है। जिनका सहायक शिक्षकों के तौर पर समायोजन हुआ था।

इसके साथ ही शिक्षामित्रों को उम्र के नियमों में छूट मिलेगी। इससे पहले 12 सिंतबर 2015 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के करीब 1.72 लाख शिक्षामित्रों का सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजन को निरस्त कर दिया था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

शिक्षामित्रों ने शुरू किया आंदोलन

सुप्रीम कोर्ट द्वारा समायोजन रद्द करने के फैसले के बाद शिक्षामित्रों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। लिहाजा, कोर्ट के फैसले के नाराज शिक्षामित्रों ने 25 जुलाई से राज्यभर में जिला स्तर पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालांकि बाद में योगी सरकार से मिले आश्वासन पर एक अगस्त को शिक्षा मित्रों ने आंदोलन स्थगित कर दिया था।

लेकिन जब 15 अगस्त तक सरकार किसी नजीते पर नहीं तो एक बार फिर शिक्षामित्रों ने 17 से 19 अगस्त तक जिला स्तर पर प्रदेश व्यापी सत्याग्रह करने के बाद 21 अगस्त से राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला ग्राउंड में 1.72 लाख शिक्षा मित्र इंसाफ की मांग करते हुए धरने पर बैठ गए।

CM योगी के आश्वासन के बाद धरना-प्रदर्शन स्थगित

लखनऊ के लक्ष्मण मेला ग्राउंड में शिक्षा मित्रों ने 21-22 अगस्त को सत्याग्रह किया और 23 अगस्त को जेल भरो आंदोलन का कार्यक्रम था, लेकिन शिक्षामित्रों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया है। इस दौरान सीएम योगी ने समान कार्य, समान वेतन की मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

साथ ही शिक्षामित्रों की मांगों पर विचार करने के लिए मुख्य सचिव राजीव कुमार ने बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव राज प्रताप सिंह की अध्यक्षता में कमेटी बनाई है। ये कमेटी शिक्षामित्रों के प्रत्यावेदन पर विचार करके जल्द ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इस कमेटी में सूचना विभाग, न्याय विभाग, समाज कल्याण और वित्त विभाग के प्रमुख सचिव सदस्य शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 45 शिक्षा मित्र कर चुके हैं आत्महत्या

सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षा मित्रों का समायोजन रद्द किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश में आए दिन शिक्षा मित्र मौत को गले लगा रहे हैं। फैसला आने के बाद अब तक करीब 50 से अधिक शिक्षा मित्र आत्महत्या कर चुके हैं।

 

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