10 हजार मानदेय के फैसले पर भड़के शिक्षामित्र, योगी सरकार पर वादाखिलाफी का लगाते हुए अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे शिक्षक

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शिक्षामित्रों का मानदेय(सैलरी) 3,500 रुपए से बढ़ाकर 10 हजार रुपए प्रतिमाह कर दिया है। मंगलवार(5 सितंबर) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मानदेय बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों से ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि सरकार की शिक्षामित्रों के प्रति पूरी सहानुभूति है।

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बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनुपमा जायसवाल ने बताया कि शिक्षामित्रों को अभी तक 3,500 रुपये मानदेय मिलता था। सरकार ने इसे बढ़ाकर 10 हजार रुपये किया है। उन्होंने बताया कि यह मानदेय वर्ष में 11 महीने के लिए मिलेगा। मानदेय बढ़ाने से 1,65,157 शिक्षामित्रों को लाभ मिलेगा। हालांकि, योगी सरकार के इस फैसले से शिक्षक संघ संतुष्ट नहीं है।

योगी सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र शाही ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। शाही ने ‘जनता का रिपोर्टर’ से बातचीत में कहा कि सरकार के इस फैसले से हम संतुष्ट नहीं है। शाही ने कहा कि हमें ‘समान काम, समान वेतन’ से कम पर कुछ भी मंजूर नहीं है।

उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सपा सरकार के कार्यकाल में सीएम योगी ने गोरखपुर में एक सभा में कहा था कि सरकार अध्यादेश लाकर शिक्षामित्रों को शिक्षक का दर्जा दे, लेकिन सत्ता में आने के बाद वह अपनी बात भूल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज से एक बार फिर राज्य के सभी जिलों में शिक्षामित्रों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है। जबतक सरकार हमारी मांगों का मान नहीं लेती यह आंदोलन चलता रहेगा।

वहीं, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेष यादव ने ‘जनता का रिपोर्टर’ से बातचीत में कहा कि योगी सरकार ने लाखों शिक्षा मित्रों के साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी जिलों में जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर हजारों शिक्षक अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन आगे चलकर बहुत बड़ा रूप लेने वाला है।

पुलिस ने बरसाई लाठियां

बता दें कि शिक्षक दिवस के मौके पर मंगलवार को राजधानी लखनऊ में शिक्षा मित्रों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। जहां उन पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। बेरोजगार शिक्षकों को पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। जिसके बाद भगदड़ मच गई और हंगामे की स्थिति पैदा हो गई। सभी शिक्षक विधानसभा का घेराव करने जा रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने लोगों पर लाठीचार्ज कर दिया। लाठीचार्ज के दौरान प्रदर्शन करने वाले कई शिक्षक घायल हो गए।

अधर में है जीवन

उप्र प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के उपाध्यक्ष राजेश कुमार साहनी ने ‘जनता का रिपोर्टर’ से कहा कि शिक्षा मित्र पिछले 16 वर्षों से लगातार प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण का कार्य कर रहे हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनका जीवन अधर में लटक गया है। लिहाजा, मानवीय आधार पर सहायक शिक्षक के तौर पर शिक्षामित्रों के समायोजन को जारी रखा जाए। शिक्षा मित्रों का कहना है कि उनके पास अनुभव के साथ-साथ स्नातक और बीटीसी का डिग्री है।

उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षकों की कमी को ध्यान में रखते हुए स्कीम के तहत उनकी नियुक्ति हुई थी। उनकी नियुक्ति किसी पिछले दरवाजे से नहीं हुई थी। वह पढ़ाना जानते हैं, क्योंकि उनके पास कई सालों का अनुभव है। अब उनके साथ उम्र के इस पड़ाव में मानवीय रवैया अपनाया जाना चाहिए। शिक्षा मित्रों का कहना है कि अधिक उम्र हो जाने की वजह से अब उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है। अब लाखों शिक्षक सरकार से उम्मीद की आस लगाए बैठै हुए हैं।

क्या है शिक्षा मित्र विवाद?

दरअसल, उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षामित्र से सहायक शिक्षक बने 1.72 लाख शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2017 को बड़ा झटका देते हुए शिक्षामित्रों के समायोजन को रद्द कर दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि यदि सरकार चाहे तो इनके टीईटी पास करने के बाद इन्हें लगातार दो भर्तियों में मौका दे सकती है। जिनका सहायक शिक्षकों के तौर पर समायोजन हुआ था।

इसके साथ ही शिक्षामित्रों को उम्र के नियमों में छूट मिलेगी। इससे पहले 12 सिंतबर 2015 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के करीब 1.72 लाख शिक्षामित्रों का सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजन को निरस्त कर दिया था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

शिक्षामित्रों ने शुरू किया आंदोलन

सुप्रीम कोर्ट द्वारा समायोजन रद्द करने के फैसले के बाद शिक्षामित्रों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। लिहाजा, कोर्ट के फैसले के नाराज शिक्षामित्रों ने 25 जुलाई से राज्यभर में जिला स्तर पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालांकि, बाद में योगी सरकार से मिले आश्वासन पर एक अगस्त को शिक्षा मित्रों ने आंदोलन स्थगित कर दिया था।

लेकिन जब 15 अगस्त तक सरकार किसी नजीते पर नहीं तो एक बार फिर शिक्षामित्रों ने 17 से 19 अगस्त तक जिला स्तर पर प्रदेश व्यापी सत्याग्रह करने के बाद 21 अगस्त से राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला ग्राउंड में 1.72 लाख शिक्षा मित्र इंसाफ की मांग करते हुए धरने पर बैठ गए।

CM योगी के आश्वासन के बाद धरना-प्रदर्शन स्थगित

लखनऊ के लक्ष्मण मेला ग्राउंड में शिक्षा मित्रों ने 21-22 अगस्त को सत्याग्रह किया और 23 अगस्त को जेल भरो आंदोलन का कार्यक्रम था, लेकिन शिक्षामित्रों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया है। इस दौरान सीएम योगी ने समान कार्य, समान वेतन की मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

साथ ही शिक्षामित्रों की मांगों पर विचार करने के लिए मुख्य सचिव राजीव कुमार ने बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव राज प्रताप सिंह की अध्यक्षता में कमेटी बनाई। इस कमेटी में सूचना विभाग, न्याय विभाग, समाज कल्याण और वित्त विभाग के प्रमुख सचिव सदस्य शामिल थे।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 50 से अधिक शिक्षक कर चुके हैं आत्महत्या

सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षा मित्रों का समायोजन रद्द किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश में आए दिन शिक्षा मित्र मौत को गले लगा रहे हैं। फैसला आने के बाद अब तक करीब 50 से अधिक शिक्षक आत्महत्या कर चुके हैं।

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