बगावत कर सकते हैं शरद यादव, राहुल गांधी से की मुलाकात, असंतुष्ट JDU नेताओं की शाम को बुलाई बैठक

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बिहार में महागठबंधन खत्म हो गया है। नीतीश कुमार फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथ हो गए हैं। महागठबंधन की सरकार से इस्तीफे के तुरंत बाद नीतीश कुमार को बीजेपी का साथ मिल गया और अब वह दोबारा आज(27 जुलाई) मुख्यमंत्री पद की शपथ ले लिए हैं।

India Today

नीतीश ने गुरुवार को छठी बार बिहार के सीएम के तौर पर शपथ ली। वहीं, सीनियर बीजेपी नेता सुशील मोदी ने बतौर उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इससे पहले देर रात नीतीश कुमार ने बीजेपी विधायकों के साथ राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया।

नीतीश कुमार ने शपथ ग्रहण करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि हमने जो भी फैसला किया है वह बिहार और उसकी जनता के पक्ष में होगा। यह विकास और न्याय सुनिश्चित करेगा। यह प्रगति सुनिश्चित करेगा। यह सामूहिक निर्णय है। मैं यह सुनिश्चित करता हूं कि हमारी प्रतिबद्धता बिहार की जनता के प्रति है।

JDU में बगावत के सुर तेज

24 घंटे के अंदर महागठबंधन छोड़कर बीजेपी के साथ सरकार बनाने वाले नीतीश कुमार के लिए आगे की राह आसान नहीं नजर आ रही है। नीतीश कुमार द्वारा महागठबंधन तोड़ने के बाद इस बीच उनकी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) में बगावत के सुर तेज हो गए हैं।

जेडीयू सांसद अली अनवर की ओर से खुलकर नीतीश कुमार के फैसले का विरोध करने के बाद पूर्व जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव की भी नाराजगी सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक नीतीश कुमार के एनडीए में जाने से शरद यादव नाराज बताए जा रहे हैं।

शायद यही वजह रही कि गुरुवार को नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्‍सा लेने के लिए शरद यादव पटना नहीं गए। इस दौरान वह दिल्‍ली में ही मौजूद रहे। इस बीच खबर आ रही है कि शरद यादव ने दिल्ली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की है।

साथ ही उन्होंने अपने घर पर शाम 5 बजे अपने घर पर बैठक बुलाई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में नीतीश द्वारा बीजेपी के साथ सरकार बनाने का विरोध करने वाले नेता शामिल होंगे। हालांकि सूत्रों के मुताबिक जेडीयू नेता केसी त्यागी ने शरद यादव से फोन पर बात की है, उन्हें मनाने की कोशिश की है।

अली अनवर ने खोला मोर्चा

जेडीयू के राज्यसभा सांसद अली अनवर ने कहा है कि उनका जमीर इसकी इजाजत नहीं देता कि वो इस कदम का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर बीजेपी के साथ जाने का फैसला किया, लेकिन मेरा जमीर गवारा नहीं करता।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, अली अनवर ने गुरुवार को कहा, “मेरा मानना है कि जिस बात को लेकर हम बीजेपी से अलग हुए वो कारण मौजूद हैं। बीजेपी कट्टरता के मामले में और तेजी से आगे बढ़ रही है। देश में भय का माहौल है। यह बिहार का नहीं, देश का मसला है। मेरा जैसा आदमी सांप्रदायिकता-कट्टरता के हमेशा खिलाफ रहा है।

उन्होंने कहा कि नीतीश जी ने अपनी आत्मा की आवाज पर बीजेपी के साथ जाने का फैसला किया, लेकिन मेरा जमीर इसकी इजाजत नहीं देता कि मैं उनके इस कदम का समर्थन करूं। अली अनवर ने कहा, “पार्टी फोरम पर मुझसे पूछा जाएगा तो मैं तफसील (विस्तार) से बात करूंगा, अपनी राय रखूंगा।”

शरद यादव भी नाराज

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अली अनवर के अलावा पूर्व जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी नाराजगी जाहिर की। सूत्रों के मुताबिक, शरद यादव ने कहा कि नीतीश कुमार ने सरकार बनाने का फैसला बहुत जल्दबाजी में लिया है। गठबंधन तोड़कर इतनी जल्दी बीजेपी के समर्थन से सरकार बनाने के फैसले का मैं समर्थन नहीं करता हूं।’

नीतीश कुमार ने दिया इस्तीफा

इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के मुद्दे पर गठबंधन के सहयोगी दल राजद के साथ ना मिट सकने वाले मतभेदों का हवाला देते हुए बुधवार(26 जुलाई) को इस्तीफा दे दिया।

कुमार ने राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी को इस्तीफा सौंपने के बाद राज भवन के बाहर संवाददाताओं से कहा कि बिहार में जो परिस्थितियां बनी हुई, उसमें महागठबंधन सरकार चलाना मुश्किल हो गया है।’ नीतीश ने कहा कि मैंने इसे सुलझाने की कोशिश की, मैंने किसी से इस्तीफे के लिए नहीं कहा। उन्होंने कहा कि मैंने केवल तेजस्वी से भ्रष्टाचार के आरोपों पर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा था।

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