शरद पवार बोले- देश तीन महीने से एक आत्महत्या की बात कर रहा है, अन्य जरुरी मुद्दों को नजरअंदाज करना सही नहीं

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राज्यसभा के 8 निलंबित सांसदों के समर्थन में एक दिन के उपवास की घोषणा करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने मंगलवार को कहा कि कृषि बिलों को पास कराने के लिए सरकार इतनी जल्दबाजी में क्यों थी।इसके साथ ही शरद पवार ने सुशांत सिंह राजपूत मामले के सहारे मोदी सरकार पर निशाना भी साधा।

शरद पवार

एनसीपी चीफ शरद पवार ने मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि, एक आत्महत्या के मामले पर पिछले तीन महीनों से बात की जा रही है। अन्य मुद्दों को नजरअंदाज करना सही नहीं है। आत्महत्या से किसान भी मर रहे हैं, सरकार को उस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। कोई भी आत्महत्या दुःखद है। क्यों पूरा देश एक मामले पर फंसा हुआ है जब कि इतने किसान आत्महत्या कर रहे हैं।

पवार ने मुंबई में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा, “मैंने प्रदर्शन कर रहे सांसदों के समर्थन में एक दिन उपवास रखने का फैसला किया है।” पवार ने कहा कि सरकार की नीयत भले ही सही हो, लेकिन उन्होंने कभी भी इस तरह से बिलों को पास होते नहीं देखा। बिल पास कराने में जल्दबाजी दिखाई गई, ऐसा तब हुआ जब सांसद कृषि बिलों को लेकर सवाल उठा रहे थे।

शरद पवार ने आगे कहा कि, “सदस्य बिलों पर ज्यादा प्रश्न पूछना चाहते थे। ऐसा लगा रहा था कि वे चर्चा करना नहीं चाहते थे। जब सांसदों को जवाब नहीं मिला तो वे सदन की वेल में पहुंच गए।” राकांपा प्रमुख ने यह भी कहा कि, “राज्यसभा के उपसभापति नियमों से परे नहीं है और राज्यसभा के सदस्यों को उनके विचार प्रकट करने के लिए निलंबित किया गया है।”

संसद परिसर में सोमवार पूरी रात धरना पर बैठे रहे राज्यसभा से निलंबित आठ सांसदों का समर्थन करते हुए नेशनल कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने मंगलवार को कहा कि, मैं भी उनके (आठ निलंबित राज्यसभा सांसदों) आंदोलन में हिस्सा लूंगा और उनके समर्थन में एक दिन का उपवास रखूंगा। बता दें कि, तृणमूल कांग्रेस से डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन, आप पार्टी से संजय सिंह, कांग्रेस से रिपुन बोरा, नासिर हुसैन, राजीव सातव, सीपीएम से केके राकेश औऱ ए करीम को संसद से निलंबित किया गया है। (इंपुट: आईएएनएस के साथ)

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