जानिए क्यों शाहरुख खान की चचेरी बहन नूरजहां ने पाकिस्‍तान में चुनावों से वापस लिया नाम

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बॉलीवुड सुपरस्टार अभिनेता शाहरुख खान की चचेरी बहन नूरजहां ने पाकिस्तान में आगामी 25 जुलाई को होने वाले संसदीय चुनावों से अपना नाम वापस ले लिया है। इससे पहले यह खबर आई थी कि नूरजहां ने चुनाव आयोग से अपना नामांकन पत्र लिया है और वह पीके-77 क्षेत्र की खैबर पख्तूनख्वा असेंबली सीट से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरेंगीं।

Shah Rukh Khan

दरअसल, नूरजहां के चुनाव लड़ने की खबर सामने आने के बाद से ही भारत में शाहरुख खान को ट्रोल किया जा रहा था।दक्षिणपंथी समूहों द्वारा बॉलीवुड सुपरस्टार पर तंज कसा जा रहा था कि क्या वह अपनी चचेरी बहन के लिए प्रचार करने पाकिस्तान जाएंगे। बता दें कि पाकिस्तान में 25 जुलाई को आम चुनाव के लिए मतदान होंगे।

हालांकि शाहरुख के साथ अपने रिश्ते को स्पष्ट करते हुए नूरजहां ने कहा था, “जब भी हम (शाहरुख और नूरजहां) फोन पर बात करते हैं तो हम शोबीज और क्रिकेट पर चर्चा करते हैं और कुछ भी नहीं।” दरअसल, नूरजहां को भी अपने देश में धार्मिक कट्टरपंथियों द्वारा लगातार निशाना साधा जा रहा था और भारतीय सुपरस्टार के साथ उनके संबंधों के कारण पाकिस्तान में उनकी वफादारी पर सवाल उठाया जा रहा था।

नूरजहां के मुताबिक आवामी नेशनल पार्टी ने उनसे अपील की थी कि वो अपना नामांकन वापस ले लें। रिपोर्ट के मुताबिक आवामी नेशनल पार्टी के नेता उनके घर पर आए थे और उन्होंने उनसे यह अपील की कि वो उस सीट पर पार्टी प्रत्याशी उमर मोहम्मद की जीत सुनिश्चित कराने के लिए चुनाव में ना उतरें। जिसके बाद उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया है।

बता दें कि पाकिस्तान की जिस आवामी नेशनल पार्टी की अपील के बाद नूरजहां ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया उस पार्टी से नूरजहां के परिवारों का बहुत पुराना रिश्ता रहा है। नूरजहां के दादा-परदादा खुदाई खिद्मतगर मूवमेंट से भी जुड़े रहे हैं। पिछले दिनों नूरजहां ने पाकिस्तानी समाचार चैनल जियो न्यूज से बात करते हुए कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि जितना समर्थन शाहरुख खान को मिलता है, उन्हें भी लोग उसी तरह समर्थन देंगे।

नूरजहां और उनका परिवार पेशावर के प्रसिद्ध किस्सा ख्वानी बाजार के शाह वली कत्ताल क्षेत्र में रहता है। नूरजहां के भाई ने बताया था कि उनके परिवार के साथ राजनीतिक विरासत जुड़ी हुई है। उनके पड़ोसियों का भी उन्हें पूरा समर्थन मिला हुआ है। पड़ोसियों का कहना है कि नूरजहां का वक्त अच्छा हो या बुरा वे सब उनके साथ रहेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक आम चुनाव लड़ने से पहले नूरजहां पार्षद भी रह चुकी हैं।

 

 

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