गौहर रज़ा को ‘अफज़ल प्रेमी’ बताने के मामले में ज़ी न्यूज़ की सजा बरकरार, 16 फरवरी को मांगनी पड़ेगी माफी

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हिंदी समाचार चैनल ज़ी न्यूज़ को न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBSA) ने बड़ा झटका दिया है। NBSA ने मशहूर उर्दू कवि और साइंटिस्ट गौहर रज़ा के खिलाफ शरारती और विवादित कार्यक्रम को प्रसारित करने के आरोप में जी न्यूज द्वारा पाए गए सजा के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। ज़ी न्यूज़ की सजा बरकरार रखते हुए NBSA ने साफ तौर पर निर्देश दिया है कि चैनल को इस महीने 16 फरवरी 2018 को फुल स्क्रीन माफीनामा चलाना पड़ेगा।

Photo: Mediavigil

दरअसल, पिछले साल मार्च 2016 में ज़ी न्यूज़ ने ‘अफ़ज़ल प्रेमी गैंग का मुशायरा’ टाइटल से एक प्रोग्राम अपने चैनल पर चलाया था। इस प्रोग्राम में गौहर रज़ा को शंकर शाद मुशायरे में पढ़ी नज़्म के लिए कथित रूप से “अफ़ज़ल प्रेमी गैंग” का सदस्य, राष्ट्रद्रोही और अफ़ज़ल गुरु का समर्थक कहा गया था। यह मामला 5 मार्च 2016 के मुशायरे का है जिसे ‘अफ़ज़ल प्रेमी गैंग का मुशायरा’ बताते हुए ज़ी न्यूज़ ने 9 और 12 मार्च 2016 के बीच जमकर हंगामा किया था।

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इस मामले में 4 अप्रैल 2016 को गौहर रज़ा ने इसकी शिकायत एनबीएसए से की थी। रजा की शिकायत पर एनबीएसए ने इस रिपोर्ट के लिए ज़ी न्यूज़ से माफ़ी मांगने और एक लाख रुपये का जुर्माना भरने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ज़ी न्यूज़ को हफ़्ते भर के अंदर एक लाख रुपये जुर्माना अदा करना होगा और 16 फ़रवरी 2018 को रात 9 बजे चैनल पर फुल स्क्रीन माफ़ीनामा चलाना होगा। नेशनल ब्रॉडकास्ट स्टैंडर्ड अथॉरिटी ने यह आदेश देते हुए ज़ी न्यूज़ की पुनर्विचार याचिका को ठुकरा दिया है।

NBSA ने 31 अगस्त 2017 को जारी अपने आदेश में टीवी ब्रॉडकास्टर्स के लिए बने नियमों का घोर उल्लंघन करार देते हुए ज़ी न्यूज को दोषी ठहराते हुए आदेश दिया था कि चैनल 8 सितंबर 2017 को रात 9 बजे बड़े-बड़े अक्षरों में माफी मांगे। NBSA ने ज़ी न्यूज़ को दोषी ठहराते हुए कहा था कि चैनल द्वारा चलाए गए इस पूरे कार्यक्रम का उद्देश्य पक्षपातपूर्ण तरीके से इस मुद्दे को सनसनीखेज बनाने का इरादा था।

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एनबीएसए के आदेश में कहा गया है कि इस रिपोर्ट का इरादा एक मुद्दे पर पक्षपाती नज़रिए से सनसनी फैलाना था, जिसमें तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की गई थी। हालांकि ज़ी न्यूज ने एनबीएसए का यह आदेश नहीं माना और पुनर्विचार याचिका दायर कर दी। बहरहाल, एनबीएसए ने उसकी तमाम दलीलें ठुकरा दी है और 8 फ़रवरी को एक बार फिर अपने पुराने आदेश को पालन करने का आदेश दिया है।

अब चैनल को किसी भी हाल में 16 फरवरी को फुल स्क्रीन हिंदी और अंग्रेजी में माफीनामा चलाना पड़ेगा। बता दें कि आतंकी अफ़ज़ल गुरु को 2001 में संसद पर हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद 2013 में फांसी दे दी गई थी।

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NBSA के आदेश के मुताबिक ज़ी न्यूज़ को निम्नलिखित माफ़ीनामा प्रसारित करना होगा। जो इस प्रकार है…

“नई दिल्ली में आयोजित वार्षिक शंकर शाद (भारत-पाक) मुशायरा के दौरान 5 मार्च 2016 को प्रो. गौहर रजा द्वारा कविता पाठ के बारे में ज़ी न्यूज़ चैनल पर 9 मार्च 2016 से 12 मार्च 2016 को “अफजल प्रेमी गैंग का मुशायरा” के शीर्षक के साथ प्रसारित कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचारों एवं इस कार्यक्रम के लिए इस्तेमाल की गई टैगलाइन के लिए “ज़ी न्यूज़” चैनल को खेद है। इसके अलावा ज़ी न्यूज़ चैनल प्रो. गौहर रजा तथा उक्त मुशायरे में भाग लेने वालों के बारे में “अफजल प्रेमी गैंग” के नाम से दिए गए विवरण के लिए भी खेद प्रकट करता है।”

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