लंबे समय तक चुनाव आयोग के कानूनी विशेषज्ञ रहे एस के मेंदीरत्ता ने AAP के 20 विधायकों के मामले में किया सनसनीखेज खुलासा

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लंबे समय तक चुनाव आयोग के कानूनी विशेषज्ञ रहे एस के मेंदीरत्ता ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP) के 20 विधायकों के मामले में और गुजरात, हिमाचल प्रदेश व कर्नाटक विधानसभा चुनाव की तारीखों के मसले पर आयोग ने उनसे सलाह तक नहीं ली। मेंदीरत्ता के इस खुलासे के बाद AAP ने चुनाव आयोगी की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाते हुए आयोग की तरफ से प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से सीधे तौर पर निर्देश लेकर काम करने का आरोप लगाया है।

Photo: Indian Express

आप के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आप के 20 विधायकों के लाभ के पद के मामले में सुनवाई के दौरान भी पार्टी ने आयोग के रवैये को पक्षपात जैसा बताया था। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक इलेक्शन कमीशन के कानूनी विशेषज्ञ रहे एस के मेंदीरत्ता ने खुलासा किया है कि आप के 20 विधायकों के मामले में और गुजरात चुनाव की तारीखों के मसले पर भी आयोग ने उनसे सलाह तक नहीं ली।

दरअसल, 79 वर्षीय मेंदीरत्ता ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में बताया, ‘ये सही है कि चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों को अयोग्य ठहराने वाले मामले में सुनवाई के दौरान या फिर राष्ट्रपति को सिफारिश भेजने से पहले उनसे कोई संपर्क नहीं किया, उनसे कोई राय तक नहीं ली।’ मेंदीरत्ता ने एक्सप्रेस को बताया कि उन्हें इस मामले में की जा रही कार्रवाई की कोई जानकारी तक नहीं थी।

उन्होंने कहा कि अगर उनसे राय ली जाती तो वो जरूर कहते कि विधायकों को उचित मौका देने में कोई हर्ज नहीं है। लेकिन किनसे राय लेनी है ये चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है। साथ ही मेंदीरत्ता ने कहा कि 20 विधायकों के मामले के अलावा गुजरात, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक विधानसभा चुनाव की तारीखों के मसले पर भी चुनाव आयोग ने उनसे सलाह तक नहीं ली। उन्होंने कहा कि जबकि इससे ​​पहले सभी चुनावों के लिए मुझसे परामर्श किया गया था।

मेंदीरत्ता के इसी बयान को आधार बनाकर आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग की कार्यशौली पर सवालिया निशान लगाते हुए आयोग द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय से सीधे तौर पर निर्देश लेकर काम करने का आरोप लगाया है। भारद्वाज ने कहा कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश का चुनाव कार्यक्रम घोषित होने पर कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग पर पक्षपात जैसे रवैये का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि उस समय आयोग ने सिर्फ हिमाचल प्रदेश का चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया था, गुजरात का नहीं।

उन्होंने कहा कि आयोग के रवैये पर उठ रहे सवालों के मद्देनजर इलेक्शन कमीशन की कार्यशैली को पक्षपात किया जाना कहना गलत नहीं होगा। भारद्वाज ने कहा कि अब तो यह साफ हो गया है कि इलेक्शन कमीशन को सलाह प्रधानमंत्री कार्यालय से मिलती है।’ उन्होंने कहा कि मेंदीरत्ता के बयान के हवाले से कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्षता से काम नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि PMO से ही दिल्ली की सरकार को अस्थिर करने का प्रयास लगातार किया जा रहा है।

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